अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की।
शिक्षकों की लड़ाई को लेकर शिक्षक संगठन पिछड़ते नजर आ रहे हैं। डीएलएड, मासिक टेस्ट और शिक्षकों से रिकवरी के निर्देश का शिक्षक संगठनों की ओर से विरोध करने के बावजूद शिक्षकों को राहत नहीं मिल पाई हैं।
शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों का मामला खासा तूल पकड़े हुए है। विभाग की ओर से इसकी एसआईटी से जांच कराई जा रही थी। शिक्षक संगठनों ने इसे शिक्षकों का अपमान बताते हुए शिक्षकों की जांच विभागीय स्तर से कराने की मांग की थी। इसके बावजूद एसआईटी जांच निरस्त नहीं हुई। शिक्षक संगठनों की ओर से डीएलएड को लेकर तर्क था कि विभाग गलती से विशिष्ट बीटीसी के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों को अप्रशिक्षित माना है। ऐसे में विभागीय गलती को शिक्षक क्यों भुगते। उन्होंने विभाग को एचआरडीए से वार्ता कर राहत दिलानी की मांग की थी, लेकिन उस पर भी उन्हें मुहं की खानी पड़ी। मासिक परीक्षा के विरोध पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ। विभाग ने एलटी के वेतन भत्ते पा रहे बेसिक शिक्षकों से रिकवरी के आदेश दिए थे। जिसका शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। हालांकि उस पर भी अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।