यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को बैंककर्मी एक दिन की हड़ताल पर रहे। कर्मियों ने बीटी गंज स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने एकत्रित होकर 11 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी। शहर से देहात तक कर्मियों की हड़ताल से 140 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
मंगलवार सुबह बैंककर्मी बीटी गंज स्थित पीएनबी मुख्य शाखा के समीप एकत्रित हुए। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कामरेड वीके गुप्ता ने कहा कि बैंककर्मी 11 सूत्री मांगों को पूरा कराने के लिए सरकार से लगातार अपील कर रहे हैं, लेकिन मांगों पर कोई ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के समय पूरा दारोमदार बैंककर्मियों के कंधे पर था। ऐसे कठिन समय में बैंककर्मियों ने दिन-रात एक कर पूरी निष्ठा से ड्यूटी निभाई। बैंककर्मियों की इस मेहनत का नतीजा है कि स्थिति अब सामान्य हो रही है। इसके बाद भी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त किए गए कार्य का भुगतान नहीं दिया जा रहा है। कैनरा बैंक इंपलाइज यूनियन के जनरल सेक्रेटरी वीके गुप्ता ने बताया कि यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी है।
यह रहे मौजूद
आजाद सिंह, राकेश सैनी, अर्जुन गुप्ता, मन्नू माकिन, अनिल अग्निहोत्री, बीएम चमोली, विशाल गुप्ता, नीला अग्रवाल, निधि अग्रवाल, शोभना दुआ, प्रिति बिष्ट, प्रियंका, मिनाक्षी सैनी, शालू, एलविन, अदिति, संगीता त्यागी, अतुल मोहन, तरुण जैन, विनोद कुमार गुप्ता, वीके गुप्ता, प्रेम सिंह, अजय पराशर, गुंजन मिश्रा, अनिल बजाज, हिमांशु, ओमवीर, सतीश कुमार, केपी थपलियाल, एएस नेगी, पीयूष शर्मा, महेश, डीके वर्मा, आदेश गोयल, चरणदास, नितिन गंभीर, राजेंद्र धामी, अखिलेश, रमेश, जनेश्वर आदि मौैजूद रहे।
यह हैं मांगे
>> नोट बंदी के समय बैंक कार्यालय में समय के पश्चात किए कार्य का उचित भुगतान की प्रतिपूर्ति।
>> सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली ग्रेच्युटी एवं अवकाश नगदीकरण को आयकर से मुक्त किए जाए।
>> सभी बैंकों में कामगार/अधिकारी निदेशकों की नियुक्ति अविलंब किए जाएं।
>> वेतन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की शुरूआत शीघ्र किया जाए।
>> पेंशन संबंधी सभी मुद्दे आरबीआई/केंद्र की तरह किए जाएं।
>> केंद्र की तर्ज पर अनुकंपा नियुक्ति योजना लागू किया जाए।
>> समस्त संवर्गों में समुचित भर्ती की जाए।
>> बैंकों द्वारा नोटबंदी में किए व्यय की प्रतिपूर्ति की जाए।
>> पांच दिवसीय बैंकिंग को शीघ्र प्रारंभ किए जाए।
>> खराब ऋणों की वसूली पर कठोर एवं कारगर कदम उठाए जाएं।
>> जानबूझकर ऋण न चुकाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।