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वेद की मूल आध्यात्मिक विधा है ज्योतिष- पंडित लेखराज

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रुड़की। श्हर में 34वें अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित लेखराज ने कहा कि ज्योतिष वेद की आध्यात्मिक विधा का मूल है। उन्होंने ज्योतिष को वैज्ञानिक पद्धति बताया कहा, इसमें ढोंग और पाखंड का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष के जरिए भविष्य वाणी के साथ-साथ सभी प्रकार की समस्याओं का निराकरण संभव है। इस दौरान ज्योतिषाचार्यों ने भारत के वर्तमान और भविष्य पर चिंतन किया। साथ ही लोगों की समस्याओं को निराकरण भी किया।
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रामनगर स्थित एक होटल में आयोजित सम्मेलन का पंडित लेखराज शर्मा, इलाहाबाद से बिजेंद्र मिश्र, दिल्ली से आए डॉक्टर एचएस रावत, विधायक प्रदीप बत्रा और उनकी पत्नी मनीषा बत्रा ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया। शिव शक्ति ज्योतिष अनुसंधान संस्थान एवं उत्तराखंड ज्योतिष परिषद की ओर से आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए पंडित रमेश सेमवाल ने कहा कि ज्योतिष जन्म से मृत्यु तक के सभी पहलुओं से जुड़ा है। उन्होंने ज्योतिष में ढोंग को उखाड़कर फेेंकने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां विज्ञान नहीं पहुंचा है, वहां पहले से ही वेदांत और ममींसा पहुंच चुके हैं। अंग्रेजी शिक्षा पद्धति ने हमारे ज्ञान को नष्ट करने का काम किया है। ज्योतिषाचार्य एचएस रावत ने कहा कि ज्योतिष विद्या को बढाए जाने के लिए शोध की जरुरत है। उन्होंने इसके लिए ज्योतिष संस्थान खोले जाने की वकालत की। डॉक्टर चंद्रशेखर शास्त्री ने बताया कि हाल ही में मोदी नगर में भारतीय ज्योतिष परिषद की स्थापना की गई है। जिसमें पंडित रमेश सेमवाल को अंतरराष्ट्रीय महामंत्री मनोनीत किया गया है। इसका उद्देश्य पुरातन विधाओं को जन जन तक पहुंचाना है। पंडित सुभेश शर्मन ने कहा कि ज्योतिष को गो गंगा गीता, गायत्री के लिए काम करना होगा। सम्मेलन में सभी ने एक मत से कहा कि भारत का भविष्य उज्जवल है और आने वाले समय में देश समूचे विश्व का मार्गदर्शन करेगा। इस दौरान सम्मेलन में पहुंचे लोगों ने कुंडली और हाथ दिखाकर समस्याओं का समाधान कराया। सम्मेलन का संचालन रजनीश शास्त्री ने किया। इस अवसर पर इलाहाबाद से बिजेंद्र मिश्र, मोदीनगर से डॉ.चंद्रशेखर शास्त्री मेरठ से डॉक्टर संजीव अग्रवाल, जयपुर से पंडित सुबेश शर्मन, देहरादून से डॉ.पीपीएस राणा, देहरादून से सुमंत आर्य, दिल्ली से आचार्य अलका, जीडी दयाल, पंडित नीलकंठ शर्मा, प्रशांत चतुर्वेदी, मोलिका दुबे आदि ने विचार रखे।
ज्योतिषाचार्य एचएस रावत ने मांग की कि सेंसर बोर्ड की तरह ही भारतीय ज्योतिष बोर्ड का भी गठन होना चाहिए। इसके लिए जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडली प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगा। इस दौरान ज्योतिषियों ने ज्योतिष विद्वानों को पद्मश्री, पदम भूषण जैसे पुरस्कार देने की मांग उठाई। इसके अलावा संकल्प लिया गया कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की दिशा में काम किया जाए। सम्मेलन में बच्चों के साथ हो रहे दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इसकी रोकथाम के लिए हमें भारतीय संस्कृति की ओर लौटना होगा।
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