भारतीय योग को विश्वभर में पहचान दिलाने के साथ 1990 में उत्तर प्रदेश सरकार व भारत सरकार पर्यटन विभाग के सहयोग से तीर्थनगरी ऋषिकेेश में पहला योग महोत्सव आयोजित करने वाले वाले योगाचार्य पद्मश्री भारत भूषण योग को भगवान से संवाद का माध्यम मानते हैं।
योग गुरू भारत भूषण पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, ज्ञानी जैल सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री मनोहर परिकर समेत कई बड़ी हस्तियों को योग व अध्यात्म की तालीम दे चुके हैं।
योगाचार्य भारत भूषण इन दिनों तीर्थनगरी के मुनिकीरेती स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम के गंगा रिसार्ट में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में पहुंचे देसी-विदेशी साधकों को योग की तालीम देकर निरोग रहने के गुर सिखा रहे हैं। महज बीस वर्ष की आयु में उन्होंने अपने घर सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से ही लोगों को योग की तालीम देनी शुरू कर दी।
योग एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार से पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने वाले भारत भूषण पहले भारतीय हैं। वह बताते हैं कि योग का मतलब दुनिया और अपने जीवन में हो रहे उतार-चढ़ाव को भूूल कर यौगिक क्रियाओं को करने के साथ प्रभु से संवाद करना है।
उन्होंने कहा कि सूर्य नमस्कार योग विधा को ऐसे लोग करने से मना करते हैं, जिन्हें योग के बारे में कोई समझ नहीं है। कहा कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति और खुशहाल जीवन जीने के लिए योग को नियमितरूप से जरूर करना चाहिए।
भारत भूषण देश के विभिन्न बंदीगृहों में कैदियों को भी योग की तालीम दे चुके हैं। योग गुरु को योग के साथ-साथ बॉडी बिल्डिंग में भी भारतश्री का अतिविशिष्ट सम्मान मिल चुका है। वर्ष 1976 में अर्जुनश्री सम्मान प्राप्त करने वाले भारत भूषण कहते हैं कि योग में ही समस्त मनुष्य जाति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का एकमात्र समाधान निहित है। उन्होंने प्रतिस्पर्धा के दौर में लंबी उम्र व स्वस्थ जीवन पाने के लिए बीस से तीस मीनट तक योग करने की सलाह दी है।