विश्व गठिया दिवस पर एम्स ऋषिकेश के आंतरिक चिकित्सा विभाग ने जन जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया। इस दौरान मरीजों और उनके तीमारदारों को गठिया से संबंधित बीमारी के कारण और उनके रोकथाम के बारे में जानकारियां दीं।
बृहस्पतिवार को संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। निदेशक ने कहा कि जानकारी के अभाव में आम लोगों को गठिया के बारे में पता नहीं होता है। इसलिए बीमारी के बचाव के लिए जागरूकता का होना बहुत जरूरी है। जनरल मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने बताया कि गठिया एक दीर्घकालिक बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के जोड़ों पर हमला करती है। जोड़ों में दर्द, सूजन और कठोरता का कारण बनती है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गठिया होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। डॉ. सुकदेव मन्ना ने कहा कि मुट्ठी बनाने में कठिनाई, थकान, कमजोरी और वजन कम होना इस बीमारी के लक्षण हैं। योग प्रशिक्षक डॉ. दीप चंद्र जोशी और डॉ. रमेश ने योगासन से गठिया रोग से बचाव की जानकारी दी। इसके अलावा डॉ. योगेश प्रीत सिंह, डा. अवनीत कुमार गुप्ता, डा. आशीष बावेजा, डा. आदित्य सूदन, डा. रजत रांका, डॉ. प्रतिवा सेठी आदि ने गठिया से जुड़ी हुई बीमारियों की जानकारी दी। इस मौके पर डा. प्रसन्न कुमार पंडा, डॉ. मुकेश, डॉक्टर दराब सिंह, डॉ. रितु सांगवान, डॉ. निधि भूतरा आदि शामिल रहे।