छठ महापर्व के तीसरे दिन गंगा घाटों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। व्रती महिलाओं ने डूबते सूरज को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। रविवार को सूर्य उदय पर व्रती महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देकर और छठी मैया से अपने परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना करेंगी। शनिवार को प्रात: काल पूर्वांचल मूल की महिलाओं ने गंगा स्नान कर घरों में भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना की। साथ ही डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजन सामग्री की टोकरी तैयारी की।
दोपहर बाद से ही श्रद्धालुओं ने चंद्रेश्वर नगर, मायाकुंड, शीशम झाड़ी, काले की ढाल, सोमेश्वर नगर, आवास विकास, वीरभद्र, आईडीपीएल, रायवाला, रानीपोखरी आदि क्षेत्रों में गंगा घाटों की ओर रुख किया। व्रती महिलाओं ने गंगा घाटों पर बनाई बेदी में संकल्प लेकर पूजा की और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा में उतरीं। शाम को त्रिवेणी घाट समेत दयानंद घाट, रामझूला घाट, साईं घाट आदि जगहों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। व्रती महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया की पूजा अर्चना की।
भोजपुरी गीतों का हुआ बिरहा मुकाबला
ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट में सार्वजनिक छठ पूजन समिति की ओर से आयोजित 25वें छठ पूजन महोत्सव कार्यक्रम के तीसरे दिन सुबह भगवान सूर्य एवं छठ मैया की आरती की गई। शाम को राजेश साहनी पार्टी की ओर से भजन संध्या की गई। इसके बाद समिति की ओर से डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य और छठ मैया की संध्याकालीन आरती की। रात को समिति की ओर से भोजपुरी गीतों का बिरहा मुकाबला आयोजित किया गया। इसमेें वाराणसी से आए नीलम सिंह और मऊ से आए उमाशंकर यादव ने शानदार प्रस्तुतियां देकर समा बांधा। इस मौके पर पीठाधीश्वर डॉ. रामेश्वर दास, हिमालय आयुर्वेदिक कॉलेज माजरी ग्रांट के प्राचार्य एके झा, पूर्व प्रधानाचार्य भरत मंदिर इंटर कॉलेज डीवीपीएस रावत, शिवमोहन मिश्रा, समिति के अध्यक्ष रामकृपाल गौतम, महासचिव नागेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष दीनदयाल राजभर आदि उपस्थित थे।
रेत के टीलों पर बैठकर की पूजा अर्चना
छठ पूजा की तैयारियों को लेकर नगर निगम की लापरवाही देखने को मिली। बरसात के दिनों में गंगा में आई बाढ़ से त्रिवेणी घाट में काफी बड़ी मात्रा में रेत का ढेर जमा हो गए थे। छठ पर्व को देखते हुए शुक्रवार को नगर निगम के कर्मियों ने जगह-जगह पर रेत के टीले बना दिए। शनिवार को छठ पर्व के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में त्रिवेणी घाट पहुंचे, लेकिन यहां जगह-जगह रेत के टीले होने के कारण अव्यवस्थाएं भी पसरी दिखीं। श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली वहीं बैठ गए। कई श्रद्धालुओं को मजबूरन रेत के टीलों पर बैठकर पूजा अर्चना करनी पड़ी।
- अपनी शादी के पहले साल से छठी मैया का व्रत रख रही हूं। यह पूर्वांचल महिलाओं का प्रमुख त्यौहार है। सच्चे दिल से जो छठी मैया की पूजा करता है उस महिला की हर मनोकामना पूरी होती है।
- गायत्री तिवारी, व्रती महिला
-विगत दस सालों से छठी मैया का व्रत रख रही हूं। छठी मैया के आशीर्वाद से परिवार में सुख शांति बनी हुई है। जो यह व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी पूरे विधि विधान से इस व्रत को रखना चाहिए।
- रेवती देवी, व्रती महिला
- इस बार तीर्थनगरी में छठी पूूजा करने वालों की संख्या में बड़ी संख्या में इजाफा हुआ है। छठी मैया के आशीर्वाद से बीमारियां दूर होती हैं, निसंतान दंपतियों को पुत्र रतन की प्राप्ति होती है।
- हरेंद्र कुमार, श्रद्धालु
- 35 सालों से भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा कर रहा हूं। अब पूजा कम और दिखावा ज्यादा हो गया है। प्रशासन की ओर से कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है।
- घनश्याम झा, श्रद्धालु