-गुणवत्ता के अभाव में दरवाजे, खिड़की टूटे, जमीन में रखा गया है केमिकल
-दरवाजे-खिड़कियां टूटीं, गेट खराब केमिकल रखने को रैक तक नहीं
ऋषिकेश। सोमेश्वर नगर पानी की टंकी परिसर में जल संस्थान देहरादून की ओर से वर्ष 2024 में बनाई गई वाटर टेस्टिंग लैब की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। करीब दो साल में ही लैब के दरवाजे-खिड़कियां टूटने लगी हैं और बरामदे का गेट भी खराब हो गया है। कर्मचारियों की शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता ने निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने की बात कही है।
पुराना भवन तोड़कर बनाई गई लैब में एक हॉल, दो कमरे, शौचालय और बाथरूम हैं। कर्मचारियों के अनुसार निर्माण के एक साल बाद ही दरवाजों में दरारें आने लगी थीं। इसकी सूचना जलकल अभियंता और जल संस्थान देहरादून के अधिशासी अभियंता को दी गई, लेकिन टूटे दरवाजों की सुध नहीं ली गई।
स्टोर में रैक नहीं
नक्शे में स्टोर बनाया गया, लेकिन केमिकल और जांच में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां रखने के लिए लोहे का रैक नहीं लगाया गया। लिहाजा केमिकल जमीन पर रखने पड़ रहे हैं।
पांच कर्मचारियों के भरोसे लैब
लैब में पद सृजित नहीं किए गए हैं। वर्तमान में दो लैब टेक्नीशियन, एक असिस्टेंट और एक फील्ड वर्कर समेत पांच कर्मचारी तैनात हैं। सफाई के लिए एक भी कर्मचारी नहीं है। यहां रोजाना 20 से 25 पानी के सैंपल जांचे जाते हैं और दवाइयों व केमिकल्स का करीब एक साल का स्टॉक एक साथ भेजा जाता है।
कोट-
- जल संस्थान की ओर से ऋषिकेश में बनाई गई प्रयोगशाला लैब के दरवाजे, खिड़की टूटने की जानकारी संज्ञान में नहीं है। भवन की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। राजेंद्र पाल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान देहरादून