जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस), वेरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज (वीओआर) सिस्टम, पॉथ इंडिगेटर, अन्य लाइटें लगे हैं। यह सभी खराब मौसम में फ्लाइट लैंडिंग में मदद करते हैं।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर रविवार को कम दृश्यता (विजिबिलिटी) के कारण दो फ्लाइटाें को डायवर्ट करना पड़ा। एयरपोर्ट निदेशक प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि अलग-अलग विमानों के प्रकार और उनमें लगे उपकरणों के कारण विमानों की लैंडिंग विजिबिलिटी में भी अंतर होता है। जौलीग्रांट में जिस तरह के विमान आवाजाही करते हैं उन्हें लैंड कराने के लिए कम से कम दृश्यता 1500 मीटर होनी चाहिए। रविवार को दृश्यता घटकर 800 मीटर रह गई थी। इस कारण विमानों की लैंडिंग नहीं हो सकी और इन्हें डायवर्ट करना पड़ता है।
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उन्होंने बताया कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस), वेरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमनी डायरेक्शनल रेंज (वीओआर) सिस्टम, पॉथ इंडिगेटर, अन्य लाइटें लगे हैं। यह सभी खराब मौसम में फ्लाइट लैंडिंग में मदद करते हैं। लेकिन, ज्यादा बारिश, लो क्लाउड, ज्यादा कोहरे के कारण जब दृश्यता बहुत ज्यादा कम हो जाती है तो पायलट को रनवे दिखाई नहीं देता और लैंडिंग कराना जोखिम भरा हो जाता है। प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि एयरपोर्ट पर कैट वन लाइट लगाने की तैयारी चल रही है। इससे भी पायलट को काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि सामान्य स्थितियों में पायलट लैंडिंग के लिए दो या तीन प्रयास करता है, लेकिन जब लैंडिंग में सफलता नहीं मिलती तो वह विमान को नजदीकी एयरपोर्ट की तरफ मोड़ लेता है। क्योंकि ज्यादा देर चक्कर लगाने से विमान का फ्यूल भी खत्म हो सकता है। लो क्वाउड की स्थिति में पायलट निर्धारित ऊंचाई तक नीचे आने के बाद विमान को वापस मोड़ लेता है।
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एयरपोर्ट पर दर्ज हुई 136.8 एमएम वर्षा
देहरादून एयरपोर्ट पर रविवार शाम तक कुल 136.8 एमएम वर्षा दर्ज की गई। अधिक वर्षा होने के कारण क्षेत्र में खेत खलियान, सड़कें जलमग्न हो गई। रविवार को एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी गिरकर मात्र 800 मीटर पर पहुंच गई।