ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना की सुरंग खोदाई से प्रभावित ग्रामीणों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा मुआवजा राशि निर्धारित किए जाने के बावजूद आरवीएनएल भुगतान में रुचि नहीं दिखा रहा। हालत यह है कि ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर आरवीएनएल कार्यालय के चक्कर काट रहे लेकिन उन्हें अधिकारियों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा।
नरेंद्रनगर विकासखंड के लोयल, लोडसी और चमेली गांव के ग्रामीणों का कहना है कि टनल निर्माण कार्य के दौरान कंपन और भू-स्खलन के कारण उनके मकानों में दरारें आ गई हैं। कई मकान असुरक्षित हो चुके हैं और बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ने की आशंका है।
लोयल निवासी वीरपाल ने बताया कि अप्रैल 2024 में राजस्व विभाग, आरवीएनएल, लोक निर्माण विभाग और भू-वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने करीब 10 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि निर्धारित की थी। इस संबंध में जिलाधिकारी टिहरी कार्यालय से आरवीएनएल को पत्र भी भेजा गया था।
ग्रामीण बासुदेव और राजेंद्र का कहना है कि आरवीएनएल निर्धारित राशि को अधिक बताते हुए भुगतान में आनाकानी कर रहा है। उनका आरोप है कि जब भी ग्रामीण अपनी समस्या लेकर आरवीएनएल कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें गेट से ही वापस लौटा दिया जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और आरवीएनएल से बरसात शुरू होने से पहले मुआवजा राशि जारी करने की मांग की है, ताकि प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्था कर सकें।
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प्रभावित क्षेत्र टनल से काफी दूर है। प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण के लिए तकनीकी समिति का गठन किया गया है। जल्द तकनीकी निरीक्षण करवा कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - भूपेंद्र सिंह, डीजीएम, आरवीएनएल