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शालीनता को सहेज कर रखें उत्तराखंडवासी : पद्मश्री नटराज

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देहरादून स्थित एक सैलून में अपने सहयोगी शक्तिमां के साथ पद्मश्री ट्रांसजेंडर नृत्यांगना नटराज? - फोटो : RISHIKESH
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उत्तराखंड में शिव हैं, विष्णु हैं, गंगा मां हैं। यहां प्रकृति साक्षात विराजमान है, यहां के लोग बहुत शालीन स्वभाव वाले हैं। उत्तराखंड वासियों को इस स्वभाव को सहेज कर रखना होगा। यह बात वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित भारत की प्रथम ट्रांसजेंडर नृत्यांगना नटराज ने अमर उजाला संवाददाता से बातचीत के दौरान कही। रविवार दोपहर नृत्यांगना अपने बचपन की सहयोगी शक्ति मां के साथ ऋषिकेश पहुंची। पद्मश्री नटराज ने कहा कि वह तमिलनाडु में 75 और देश विदेश में इंटरनेट के जरिये करीब 300 बच्चों को भारतनाट्यम नृत्य की बारीकियां सिखाती हैं। आने वाले समय में वह उत्तराखंड में भी नृत्यकला केंद्र खोलना चाहती हैं।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वह एक ट्रांसजेंडर है, यही कारण था कि परिवार वाले उन्हें नृत्य सीखने से मना करते रहे। वह महज 11 वर्ष की थी तभी उनका संपर्क शक्ति मां से हुआ। उनका मुझे भरपूर साथ मिला। नृत्यांगना नटराज ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 में तमिलनाडु सरकार के मुख्यमंत्री करुणानिधि से मांग की थी कि वह ट्रांसजेंडरो के लिए एक नये शब्द को प्रचलन में लाएं। उन्होंने इसके लिए थिरूनंगई शब्द की पैरवी की थी। इसमें थिरू का अर्थ भगवान और नंगई का अर्थ सुंदर स्त्री से है। इस शब्द को सरकार से न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि विधानसभा में प्रस्ताव लाकर इसे प्रचलन में भी लाई। भारत सरकार से भी यही मांग है कि इस शब्द को प्रचलन में लाएं।
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