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Iबोले- संस्कृति को बचाना है तो मूल निवास 1950 लागू करना जरूरीI
सख्त भू-कानून लागू करने, मूल निवास और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने दुर्गा चौक भानियावाला से लेकर डोईवाला तक महारैली निकाली। जिसमें काफी संख्या में उक्रांद कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। उक्रांद कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
केंद्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह कठैत ने कहा कि यदि उत्तराखंड के मूल निवासियों और संस्कृति को बचाना है तो मूल निवास 1950 लागू करना जरूरी है। आरोप लगाया कि अब तक भाजपा और कांग्रेस की सरकार ने हमेशा बाहरी निवासियों को स्थानीय से अधिक प्राथमिकता दी है। जिससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार नही मिल पा रहा है। राज्य आंदोलनकारियों और पूरे प्रदेश की जनता ने अलग राज्य बनाकर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी। लेकिन सुख-सुविधाओं के आदी हो चुके भाजपा और कांग्रेस के नेता गैरसैंण में जाना ही नही चाहते हैं।
संरक्षक त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि सरकार बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 1950 मूल निवास और सख्त भू-कानून लागू नहीं करना चाहती है। दूसरे राज्यों के लोगों ने पहाड़ के लोगों की जमीनें औने-पौने दामों या खुर्द-बुर्द कर खरीद ली हैं। 23 वर्ष बीतने पर भी जनता रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए तरस रही है। शहीद हुए राज्य आंदोलनकारियों के सपने आज भी अधूरे हैं। कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों में उक्रांद प्रदेश की सभी पांचों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा। मौके पर मोहन सिंह असवाल, केंद्रपाल तोपवाल, रविंद्र सेमवाल, धर्मवीर गुंसाई, डाॅ. कृपाल सिंह रावत, चंद्रमोहन गडिया, युद्धवीर चौहान, अनिता कोटियाल, संगीता उनियाल आदि उपस्थित रहे।