परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन सांध्यकालीन गंगा आरती में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज, माता मंगला ने प्रतिभाग किया
राज्यपाल ले. जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमारे मानसिक और आत्मिक विकास में भी सहायक है। यह हमें शांति, प्रेम और एकता का संदेश देता है। आप सभी जो पूरे विश्व से परमार्थ निकेतन आए हैं, योग के ब्रांड एंबेसडर हैं। यहां आकर आप इस दिव्य भूमि से आर्ट ऑफ योग को अपने साथ लेकर जाएं।
उन्होंने ऊं शांति की बड़ी ही सुंदर व्याख्या की। कहा कि उत्तराखंड तप भूमि है, योग की भूमि है, संतों की भूमि है। यहां से आप सभी वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश लेकर जाएं। उन्होंने भारत की सभ्यता व संस्कृति अतिथि देवो भव की भी सुंदर व्याख्या की।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मानवता के लिए समर्पण ही योग है। मानवता की एकता ही योग है। योग, पूरे विश्व को एकता से सूत्र में बांधता हैं। पद्मश्री कैलाश खेर ने कहा कि यह समय परिवर्तन का समय है, इसलिए हमें अपने लक्ष्य के लिए जीना चाहिए।
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो बात करते हैं और दूसरे वे जिनकी बात होती है। दुनिया में आगे बढ़ने के लिए ज्ञान के साथ ध्यान भी जरूरी है। हम सभी किसी विशेष उद्देश्य के लिए आए हैं। समापन समारोह के दौरान पद्मश्री कैलाश खेर और पद्मश्री शिवमणि की अद्भुत प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आश्रम की ओर से अतुलनीय योगदान के लिए राज्यपाल, माता मंगला और भोले महाराज को गंगा अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया।
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गंगा घाट पर योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक विचारों का हुआ संगम
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन परमार्थ निकेतन में योग जिज्ञासुओं ने योग के माध्यम से आध्यात्मिकता और शांति के अनूठे अनुभवों का आनंद लिया। गंगा घाट पर योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक विचारों का अद्भुत संगम हुआ।
महोत्सव के अंतिम दिन सूर्योदय के समय मंत्रोच्चारण के साथ दिन का शुभारंभ हुआ। विश्व शांति यज्ञ के बाद विशेष योग और ध्यान सत्र में आत्मा व हृदय में योग, आधुनिक जीवन में तनाव को दूर करने के लिए आयुर्वेद, आहार-शक्ति और स्वास्थ्य के लिए योग, साउंड बाथ के पश्चात आध्यात्मिक सत्र श्रृंखला प्रेम योग का विशेष आयोजन किया गया। प्रेम योग सत्र में स्वामी चिदानंद सरस्वती, प्रेम बाबा और साध्वी भगवती सरस्वती ने प्रेम और आध्यात्मिकता पर आधारित विशेष जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य प्रेम, करुणा और शांति के महत्व को समझना और जीवन में इसे कैसे आत्मसात करना है पर विशेष चर्चा हुई। ब्राजील से आए प्रेम बाबा, डॉ. निशि भट्ट, योगाचार्य मोहन भंडारी, योगाचार्य दासा दास आदि ने कार्यक्रम को संबोधित किया। कैलाश खेर का संगीत न केवल कानों को, बल्कि दिल और आत्मा को भी स्पर्श किया।