लिवर फेल वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स में अब लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध हो गई है। रोट्टो (रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) ने एम्स को लिवर ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी है। एम्स प्रशासन का कहना है कि अब लिवर ट्रांसप्लांट भी किए जाएंगे। एम्स उत्तराखंड का पहला मेडिकल संस्थान बन गया है जहां लीवर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।
एम्स ऋषिकेश में अभी तक किडनी व कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध थी। रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने आठ जनवरी 2021 को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति एम्स को दी थी। तब से एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सक दो किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं। वहीं 20 अगस्त 2019 को उत्तराखंड स्वास्थ्य निदेशालय से एम्स प्रशासन को कार्निया ट्रांसप्लांट की अनुमति मिली थी। जिसके बाद से एम्स अब तक 426 कार्निया ट्रांसप्लांट कर चुका है। अब एम्स में लिवर भी ट्रांसप्लांट होगा।
रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने पिछले सप्ताह एम्स का निरीक्षण किया था। एम्स प्रशासन का कहना है निरीक्षण के बाद रोट्टो (रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) ने लिवर ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी है।
Iदो तरह से होता है लिवर ट्रांसप्लांटI
लिवर ट्रांसप्लांट दो तरह से होता है। एम्स गेस्ट्रो विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और लिवर ट्रांसप्लाट समिति के अध्यक्ष डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि एक विधि में ब्रेन डेड व्यक्ति से लिवर लेकर मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस विधि को डीडीएलटी (डिजीज डोनर लिवर ट्रांसप्लांट) कहते हैं। दूसरी विधि में परिजन या रिश्तेदार जिसका ब्लड ग्रुप मरीज से मिलता हो, वह अपने लिवर का एक हिस्सा डोनेट करता है। लिवर फिर रीजनरेट हो जाता है। लिवर ट्रांसप्लांट एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें एक जिंदा और मेडिकली फिट इंसान अपने लिवर का कुछ हिस्सा डोनेट कर सकता है और इससे उसे कुछ नुकसान नहीं होता, क्योंकि लिवर में रीजेनरेटिंग क्षमता होती है और समय के साथ डोनर का लिवर फिर से जेनरेट हो जाता है।
Iक्या है रोटोI
रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन वह सरकारी संस्था है जो मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 मानव अंगों को अलग करने तथा इनके भंडारण के लिये विभिन्न नियम निर्धारित करता है। मानव अंगों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए यह चिकित्सीय उपयोग हेतु मानव अंगों के प्रत्यारोपण को विनियमित करता है।
Iक्या है लिवर ट्रांसप्लांटI
एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होने से इसका सबसे अधिक फायदा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को होगा। निजी अस्पतालों में लिवर ट्रांसप्लांट का खर्चा करीब 15 से 25 लाख के बीच आता है। जबकि सरकारी अस्पताल में निजी अस्पतालों के खर्च की तुलना एक चौथाई में लिवर ट्रांसप्लांट हो जाएगा।
Iरीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने पिछले सप्ताह एम्स का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद अब एम्स को लिवर ट्रांसप्लांट की अनुमति मिल गई है। अब एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट भी होंगे। -प्रो. (डा.) मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेशI