खरीफ की फसल की बुआई करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसान मात्र 127 रुपये प्रति बीघा देकर अपनी धान और दूसरी खरीफ की फसलों का बीमा करा सकते हैं। खरीफ की फसल के लिए बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 जुलाई है।
प्रधानमंत्री बीमा योजना के अंतर्गत सूखा, बाढ़ ओलावृष्टि, कीटों के हमले, अतिवृष्टि या अन्य आपदाओं में बीमा कंपनी किसानों को 6082 रुपये प्रति बीघा देगी। इसके लिए किसानों को फसल खराब होने के 72 घंटों के अंदर बीमा कंपनी, कृषि अधिकारियों या टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देनी होगी। जिसके बाद कृषि अधिकारी, बीमा कंपनी और राजस्व विभाग की टीम द्वारा संबंधित किसान की खराब हुई फसल का सर्वे कर तय किया जाएगा कि कितने प्रतिशत फसल खराब हुई है। सौ प्रतिशत फसल खराब होने पर किसान को 6082 रुपये प्रति बीघा दिया जाएगा। पचास प्रतिशत पर आधा और उससे कम पर और कम मुआवजा मिलेगा।
फसल बीमा योजना में सबसे अच्छी बात ये होगी कि किसानों को फसल खराब होने पर किसी भी अधिकारी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नुकसान की सर्वे रिपोर्ट संबंधित अधिकारी किसान के खेत में किसान के सामने ही तैयार करेंगे। जिसके बाद फसल बीमा की पूरी धनराशि सीधे किसान सम्मान निधि की तरह किसानों के खातों में पहुंच जाएगी।
सूखा, बाढ़ ओलावृष्टि, कीटों के हमले, अतिवृष्टि आदि का सबसे अधिक असर धान की फसल पर होता है। इसलिए धान की फसल बोने वाले किसानों के लिए यह बीमा योजना मददगार साबित हो सकती है। फसल बीमा योजना कराने के लिए फार्मर रजिस्ट्री होना जरूरी है। संवाद
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फसल बीमा के लिए ऐसे करें आवेदन
किसान कृषि अधिकारियों से मिलकर संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क कर अपना बीमा करा सकते हैं। वहीं सीएससी केंद्रों में जाकर भी निशुल्क अपना फसल बीमा कराया जा सकता है। फसल बीमा कंपनी की प्रबंधक रोशनी ने कहा कि फसल बीमा योजना किसानों के लिए वरदान है। किसानों को अपनी फसल के नुकसान की भरपाई के लिए फसल का बीमा जरूर कराना चाहिए। फसल खराब होने पर बीमा की धनराशि सीधे किसानों के खातों में आएगी। वहीं अगली खरीफ की फसल से फसल बीमा योजना में वन्य जीवों से हुए नुकसान की भरपाई को भी शामिल किया जाएगा।
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- मात्र 127 रुपये की प्रीमियम पर फसल का बीमा किया जा रहा है, जिसका सभी किसानों को लाभ लेना चाहिए। प्रदेश और केंद्र सरकार किसानों की फसलों को आपदाओं से बचाने के लिए इस योजना को लेकर आई है। - प्रियंका थपलियाल, ब्लॉक कृषि अधिकारी डोईवाला