दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पढ़े गए देश-विदेश के शोधार्थियों के 75 शोध पत्र
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया। विज्ञान संकाय की ओर से आयोजित सेमिनार में विषय विशेषज्ञों ने 75 शोध पत्र पढ़े।
सेमिनार के समापन पर संयोजक प्रो. वाईके शर्मा ने कहा कि भौतिक विज्ञान के आविष्कारों, नियमों और सिद्धांतों से विकसित तकनीक ने मानव जाति के जीवन स्तर को काफी बदला है। भविष्य की पीढ़ी के अस्तित्व के लिए ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज वास्तव में आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सराहनीय परिवर्तन किए हैं। प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थी केंद्रित हो गई है। स्किल डेवलपमेंट के अनेक नए पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं। उन्होंने कहा कि सेमिनार में प्रस्तुत आमंत्रित व्याख्यानों एवं शोध पत्र प्रस्तुतीकरण से शोधार्थियों को निश्चित रूप से लाभ होगा।
सेमिनार के अंतिम दिन एकलोन इंस्टीट्यूट फरीदाबाद के प्रो. अनिल कुमार ने धमनियों में रक्त प्रवाह का कम्प्यूटेशनल एवं गणितीय अध्ययन के बारे में विस्तार से बताया। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सूरत के प्रो. सुशील कुमार ने सतत विकास में गणित की भूमिका एवं गणितीय मॉडलिंग के अनुप्रयोगों की जानकारी दी। कहा कि सतत विकास में गणितीय माॅडलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मुंबई विवि के प्रो. अहमद अली प्राकृतिक उत्पादों से चीनी विषाक्तता को कम करने के रासायनिक तरीकों का अध्ययन प्रस्तुत किया। आयोजक सचिव डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने दो दिन तक चली संगोष्ठी में आयोजित विभिन्न सत्रों की आख्या प्रस्तुत की। सह आयोजक सचिव डॉ. सीमा बैनीवाल ने आमंत्रित वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समापन समारोह में प्रो. दिनेश शर्मा, प्रो. मनोज यादव, प्रो. बीपी बहुगुणा, प्रो. दीपा शर्मा, प्रो. हितेंद्र सिंह, प्रो. स्मिता बडोला, प्रो. इंदु तिवारी, डॉ. एसके कुड़ियाल, डॉ. आरके जोशी आदि मौजूद रहे।