चारधाम यात्रा के लिए बाहरी प्रांतों से तीर्थयात्रियों का हुजूम उमड़ रहा है। यही वजह है कि 2013 में दैवी आपदा के बाद से मंद पड़ी यात्रा का इस बार रिकार्ड टूटने के आसार हैं। यात्रा प्रशासन संगठन के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। जहां पिछले साल यात्रा शुरू होने के छह दिन में महज 22 बसों से करीब तीन हजार श्रद्घालु आस्थापथ की ओर बढ़े थे, इस साल श्रद्घालुओं की अनुमानित संख्या 40 हजार को पार कर चुकी है।
वर्ष 2013 में केदारघाटी में भीषण जलप्रलय से हुई तबाही से तीर्थयात्रियों में खौफ इस कदर छाया कि उन्होंने उत्तराखंड का रुख नहीं किया। यही वजह है कि वर्ष 2014 और 2015 में चारधाम यात्रा रफ्तार नहीं पकड़ सकी। इसका सीधा असर राज्य की आर्थिकी पर पड़ा।
खुशखबरी है कि वर्ष 2016 में दैवी आपदा का खौफ तीर्थयात्रियों के जेहन से पूरी तरह साफ हो गया है। इस बार देवधामों के दर्शन के लिए बाहरी प्रांतों से तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ रहा है। यात्रा प्रशासन संगठन के व्यक्ति सचिव एके श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले साल चारधाम यात्रा 21 अप्रैल को शुरू हुई थी, तब छह दिन में 22 बसों से करीब तीन हजार यात्री है चारधाम के दर्शन के लिए गए थे।
इस साल यात्रा का आगाज सात मई से हुआ और छह दिन में संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की 587 बसों से अनुमानित 40 हजार से अधिक श्रद्घालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए रवाना हो चुके हैं। तीर्थयात्रियों के उत्साह से परिवहन व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं।
आस्थापथ पर गई बसें
7 मई 24
8 मई 84
9 मई 85
10 मई 97
11 मई 155
12 मई 182
फोटोमीट्रिक पंजीकरण
7 मई 2098
8 मई 3777
9 मई 4002
10 मई 5569
11 मई 5410
12 मई 6219