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Iअभिभावकों की ओर से विद्यालय में की जा रही है शिक्षकों की अस्थाई व्यवस्थाI
इंटर कॉलेज किमसार में 12 वर्षों से विज्ञान के शिक्षकों का पद रिक्त चल रहा है। बोर्ड परीक्षा के समय में छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों की ओर से विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
वर्ष 1964 में अशासकीय विद्यालय इंटर कॉलेज किमसार का संचालन हुआ था। वर्तमान में इस विद्यालय में करीब 138 छात्र संख्या है। विद्यालय में शिक्षकों के 10 पद हैं। लेकिन वर्तमान में यहां केवल तीन शिक्षक हैं। पांच शिक्षकों को यहां व्यवस्था पर तैनात किया गया है।
प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2013 में इस विद्यालय में विज्ञान वर्ग को मान्यता दी गई थी। लेकिन विद्यालय में विज्ञान वर्ग के अध्यापक रखने की मान्यता नहीं दी। विद्यालय में डांडा मंडल क्षेत्र के करीब 25 गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। वर्तमान में इंटरमीडिएट के विज्ञान संकाय में 19 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पांच शिक्षकों को विद्यालय में व्यवस्था पर रखा गया है। शिक्षकों के वेतन के लिए हर महीने कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों से 250 से 350 रुपये तक का शुल्क लिया जा रहा है।
अभिभावक रवि रावत, अर्जुन रावत, संजय बडोला, सतेंद्र नेगी, सुबोध नेगी, दीपक नेगी, मनोज कुकरेती, सुनील अमोली ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। विद्यालय में लंबे समय से शिक्षक नहीं हैं। जिसके चलते लगातार विद्यालय से छात्र संख्या घट रही है। अशासकीय विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कई बार शासन और प्रशासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
Iइन विषयों के पद चल रहे हैं खालीI
विद्यालय में गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और अंग्रेजी विषय के शिक्षकों का पद रिक्त चल रहा है।
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Iकक्षा 11 और 1 के छात्र-छात्राओं को इतिहास राजनीतिक विज्ञान के साथ ही कक्षा 9 और 10 के छात्रों को सामाजिक विज्ञान पढ़ाता हूं। विद्यालय में खाली पद भरने का अधिकार प्रबंधन समिति को है। जिसमे प्रबंधक मुख्य होता है। जिसमें अनुमति शासन से मिलनी है। उत्तराखंड में भर्ती प्रक्रिया पर 2021 से रोक लगी है। शासन स्तर पर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। - धर्मवीर पासी, प्रधानाचार्यI