शिक्षा विभाग की लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। विद्यालयों में बने पेयजल टैंक की महीनों से सफाई नहीं हो रही है। बच्चे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और जल जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में पीलिया, टाइफाइड और डायरिया के मामले बढ़ रहे हैं। सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कुछ स्कूलों में पेयजल टैंकों की सफाई की पड़ताल की। पड़ताल में पेयजल टैंकों में गंदगी देख स्कूल के जिम्मेदारी भी चुप्पी साध गए।
सुभाष चौक स्थित नाभा हाउस के स्कूल में करीब 150 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। यहां बने पेयजल टैंक के अंदर साफ-सफाई नहीं दिखी। टैंक में गंदगी जमीं हुई थी। इसी टैंक का पानी स्कूल के बच्चे पीते हैं। देहरादून रोड स्थित जीजीआईसी में करीब सौ छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय का पेयजल टैंक के अंदर पेड़ों के जड़ें और काई तैरती नजर आई। टैंक की महीनों से सफाई नहीं हुई। इसी टैंक से विद्यालय परिसर में पेयजल आपूर्ति होती है। गंदगी देखकर स्कूलों के जिम्मेदार चुप्पी साध गए। बताने लगे कि जल्द सफाई की जाएगी।
Iसार्वजनिक प्याऊ के टैंक का ढक्कन गायबI
चंद्रभागा पुल के समीप सड़क किनारे बने जलसंस्थान के सार्वजनिक प्याऊ की हालत भी खराब है। प्याऊ के टैंक का ढक्कन महीनों से गायब है। ढक्कन न होने से टैंक के अंदर गंदगी जमा है। इस प्याऊ से पर्वतीय रूटों पर सफर करने वाले यात्री पानी पीते हैं। लेकिन जलसंस्थान की लापरवाही के चलते यात्री और राहगीर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
Iदूषित पानी से फैल रहे जल जनित रोगI
एसपीएस राजकीय चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. विकास घिल्डियाल ने बताया कि इन दिनों जल जनित रोग फैल रहे हैं। इसकी वजह दूषित पानी है। ओपीडी में रोजाना पीलिया, टाइफाइड और डायरिया के 40 से अधिक मरीज आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को साफ और उबाला पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
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Iजलसंस्थान की ओर से बनाए गए सार्वजनिक प्याऊ टैंकों की साफ-सफाई की गई है। यदि किसी टैंक की सफाई नहीं की गई है तो जल्द ही इसको दुरुस्त किया जाएगा। - अनिल नेगी, जलकल अभियंता
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Iबरसात के समय टैंक की सफाई करवाई गई थी। अब जल्द ही पेयजल टैंक की सफाई की जाएगी। - दीना राणा, प्रधानाचार्य जीजीआईसीI