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Rishikesh News: गरतांग गली की तर्ज पर विकसित हुआ कोटली भेल ट्रैक

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Iलोनिवि ने तैयार किया 16 किलोमीटर का ट्रैक, ट्रैकिंग रूट की जानकारी ले रहे पर्यटकI
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ऋषिकेश शहर के नजदीक भी ट्रैकिंग रूट विकसित हो गया है। इसी ट्रैक मध्य में पड़ रही कोटली भेल पहाड़ी को लोनिवि ने गरतांग गली की तर्ज पर विकसित किया है। 16 किलोमीटर के ट्रैक के मध्य में कोटली भेल आकर्षण का केंद्र बन रहा है। कई पर्यटक इस रूट पर ट्रैकिंग के लिए जा रहे हैं।
फरवरी में पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कई वर्षों से बदहाल पड़े ऋषिकेश-बदरीनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर ट्रैकिंग की संभावनाओं को तलाश था। डीएम द्वारीखाल ब्लॉक के सिमालू गांव से कोटली भेल पहाड़ी, महादेवचट्टी होते हुए नौडखाल तक पैदल गए थे। उसके बाद उन्होंने लोनिवि लैंसडौन को सिमालू से नांंद गांव तक यात्रा मार्ग को ट्रैकिंग रूट में विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए थे। उसके बाद लोनिवि ने प्रस्ताव बनाकर जिलाधिकारी को भेजा था।
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16 किलोमीटर ट्रैकिंग रूट और लकड़ी की सुरक्षा दीवार बनाने के लिए कुल 48 लाख रुपये का बजट जारी किया था। अब यह ट्रैक बनकर तैयार हो गया है। इस 16 किलोमीटर लंबे ट्रैक में पड़ने वाले कोटली भेल की पहाड़ी को गरतांग गली की तर्ज पर विकसित किया गया है। कई ट्रैकर इस रूट पर ट्रैकिंग के लिए जा रहे हैं। राफ्टिंग कारोबारी राजीव बिष्ट, यश भंडारी, अभय शर्मा ने बताया कि ऋषिकेश के नजदीक ट्रैकिंग रूट विकसित होने के बाद इसका लाभ पर्यटकों को मिलेगा। स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलेगा। राफ्टिंग करने आने वाले पर्यटकों को नए ट्रैकिंग रूट खुलने की जानकारी दी जा रही है।


Iब्रिटिश शासनकाल में पहाड़ी को काटकर बनाया था मार्गI
ऋषिकेश बदरीनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर कोटली भेल पहाड़ी को काटकर ब्रिटिश शासनकाल में सात फुट चौड़ी रोड बनाई गई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन समय में इस पहाड़ी पर मजदूरों को लटकाकर पहाड़ी को काटा गया था। इस मार्ग पर 1998 तक पैदल यात्रा चलती रही। कोटली भेल पहाड़ी को देखने के लिए पूर्व में कई विदेश पर्यटक आ चुके हैं। वह इस पहाड़ी पर डाक्यूमेंटरी बना चुके हैं।


Iकैसे पहुंचे कोटली भेल ट्रैक तकI

ऋषिकेश से बदरीनाथ हाईवे पर महादेवचट्टी धार (35 किमी) तक पहुंचना होगा। वहां एक किलोमीटर नीचे पैदल गंगा नदी की ओर आना होगा। उसके बाद बाद झूला पुल को पार करने के बाद रामपाटी होते हुए कोटली भेल ट्रैकिंग रूट तक पहुंचा जा सकता है। यहां से सिमालू तक नौ किलोमीटर की ट्रैकिंग की जा सकती है। ऋषिकेश से मोहनचट्टी होते हुए नांद गांव तक जाने के बाद वहां से कोटली भेल-सिमालू तक 16 किमी की ट्रैकिंग की जा सकती है।
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I- सिमालू से नांद गांव तक 16 किलोमीटर ट्रैक बनकर तैयार हो गया है। इसमें कोटली भेल पहाड़ी को गरतांग गली की तर्ज पर विकसित किया गया है। इस ट्रैक के निर्माण में 48 लाख रुपये की लागत आई है। - आलोक जैन, सहायक अभियंता लोनिवि लैंसडौनI
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