वर्ष 2013 में आई दैवीय आपदा के वक्त लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक तीर्थनगरी स्थित आस्थापथ क्षतिग्रस्त हो गया था। क्षतिग्रस्त आस्थापथ की सरकार ने अब तक सुध नहीं ली है। आस्थापथ को बचाने के लिए सीटी ब्लाक बनाने को सिंचाई विभाग उपखंड ऋषिकेश के द्वारा भेजा गया करीब साढ़े दस करोड़ का प्रस्ताव शासन की फाइलों में कैद है। आस्थापथ का जीर्णोधार नही होने से बरसात में गंगा का जलस्तर बढ़ने और भूमि कटाव होने से भारी तबाही का डर लोगों को सता हो सकता है।
सिंचाई विभाग उपखंड अधिकारियों ने बताया कि साल 2013 में आई बाढ़ से त्रिवेणी घाट से बैराज तक करीब ढाई किलो मीटर का आस्थापथ क्षतिग्रस्त हो गया था। भीषण जलप्रलय के कारण आस्थापथ के बाउंड्रीवाल के नीचे भारी गड्ढे हो गए थे। उन्होंने 12 अक्टूबर 2015 को सिंचाई विभाग ऋषिकेश उपखंड ने सिंचाई विभाग देहरादून को 10 करोड़ 56 लाख 83 हजार का प्रस्ताव भेजा। जिसके बाद प्रस्ताव को टीएसी को भेजा गया। टेक्निकल ऑडिट सेल ने योजना वाली जगह का सर्वे किया।
सर्वे में यह बात सामने आई कि आस्थापथ के बाउंड्रीवाल के नीचे काफी गहरे गड्ढे हो गए और कई जगहों से आस्थापथ को बने ब्लाक क्षतिग्रस्त हैं। बता दें कि तीर्थनगरी में बना आस्थापथ के किनारे बसे त्रिवेणी घाट, कोलघाटी, वीरभद्र, बैराज, गैरोलानगर भारी जनसंख्या वाला क्षेत्र है। इसके साथ ही आस्थापथ से राष्ट्रीय राजमार्ग हरिद्वार-देहरादून भी लगा है। बरसात के समय यही आस्थापथ बाढ़ से होने वाले कटाव को रोकता है। ऐसे में अगर समय रहते आस्थापथ के बचाव के लिए सीटी ब्लाक का निर्माण नही किया गया। तो उफनाई गंगा नदी के बाढ़ के पानी के आगे प्रशासन की लापरवाही जनमानस की जान की दुश्मन न बन जाए।
विभागीय जांच में पाया गया कि गंगा किनारे बने आस्थापथ के बाउंड्रीवाल के नीचे भारी गड्ढे हो गए हैं। हमारी ओर से विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही शासन से उक्त योजना के लिए बजट की मंजूरी मिलती है। जल्द ही आस्थापथ का जीर्णोधार किया जाएगा।
सीएम भट्ट, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग ऋषिकेश