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Iकूड़े की दुर्गंध से सांस लेना तक दूभर, घरों को बेचकर जाने को लोग मजबूरI
गोविंदनगर में शहर के बीचों-बीच बना कूड़े का मैदान तीन वार्डों के लोगों के लिए जी का जंजाल बना है। कूड़े की दुर्गंध से लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। गोविंदनगर, शांति नगर और बनखंड़ी के लोग गंदगी से इतने परेशान है कि मेहमानों को अपने घरों के बजाय होटलों और आश्रमों में ठहराते हैं। कई लोग घर बेचकर जाने को मजबूर हैं।
शहर के बीचों-बीच गोविंदनगर के खाली मैदान में दो दशक पहले अस्थायी कूड़ा डंपिंग जोन बनाया गया। समय के साथ यहां कूड़े का पहाड़ बन गया। वर्ष 2018 में नगर निगम बनने के बाद स्थानीय लोगों को गोविंदनगर से कूड़े का पहाड़ हटने की उम्मीद जगी थी। तब नगर निगम के चुनाव में प्रत्याशियों के लिए कूड़े का मैदान प्रमुख चुनावी मुद्दा भी रहा। नगर निगम का एक कार्यकाल खत्म हो गया, लेकिन वार्ड 16, 17 और 18 के लोगों को कूड़े के पहाड़ से छुटकारा नहीं मिल सका है।
Iगोविंदनगर में कूड़े की दुर्गंध से सांस लेना तक दूभर हो जाता है। क्षेत्र के अधिकांश बुजुर्गाें को दमा की शिकायत है। इसकी वजह गंदगी है। क्षेत्र के लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -पुष्पा कालरा
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Iदुर्गंध के कारण मेहमानों को घर बुलाने में भी शर्म आती है। पारिवारिक समारोह या मेहमानों के रहने आदि की व्यवस्था अपना घर होने के बावजूद होटल और धर्मशालाओं में करनी पड़ती है। रेखा गुप्ता
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Iकूड़ा मैदान होने से आसपास की जमीनों का भाव काफी कम आंका जाता है। गंदगी से तंग आकर कई परिवार घर और जमीन बेचकर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं। कई लोग बीमार हो रहे हैं। - जवाहर लाल कपूर
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Iकूड़े का पहाड़ हटाने की मांग को लेकर पूर्व में पार्षद पद से इस्तीफा देकर धरना-प्रदर्शन किया था। पद से हटने के बाद भी गंदगी हटाने का प्रयास जारी है। - अजीत गोल्डी, निवर्तमान पार्षद, वार्ड नंबर 16
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Iगोविंदनगर के कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। कूड़े का शत-प्रतिशत निस्तारण करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए है। - शैलेंद्र सिंह नेगी, नगर आयुक्त, ऋषिकेशI