एम्स का दीक्षांत समारोह अन्य दीक्षांत समारोह से कुछ विशेष रहा। इस बार समारोह में उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यावरणीय चेतना के साथ आधुनिक तकनीक को वरीयता दी गई।
गाउन परंपरा को त्यागकर पहाड़ी संस्कृति को अपनाया गया। वहीं उपाधि वितरित किए जाने के साथ ही पहली बार उपाधि धारकों के डिजिलॉकर में भी उपाधियां अपलोड की गई।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का पांचवां दीक्षांत समारोह पहाड़ी संस्कृति से भरपूर रहा। समारोह में जहां गाउन और शोभा यात्रा जैसी वर्षों से चली आ रही परंपरा को त्याग दिया गया। वहीं अतिथि और उपाधि धारक पहाड़ी टोपी के साथ सादगी पूर्ण परिधानों में नजर आए।
ऑडिटोरियम के मुख्य द्वार पर अतिथियों के आगमन पर वेदपाठी छात्रों ने स्वास्ति वाचन गाया और तांदी नृत्य व पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ स्वागत किया। पर्यावरण चेतना के संदेश के तहत सभी अतिथियों को एम्स की ओर हरित पौध भी भेंट की गई। संवाद
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14 में से 12 स्वर्ण पदक छात्राओं को
14 में से 12 स्वर्णपदक छात्राओं की झोली में गए हैं। आठ छात्राओं ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए है। वहीं एक छात्रा को रजत पदक मिला है।
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चार दीक्षांत समारोह में ये रहे मुख्य अतिथि
एम्स का पहला दीक्षांत समारोह तीन नवंबर 2018 को हुआ था। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी। दूसरा दीक्षांत समारोह 14 मार्च 2020 को आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल हुए। तीसरा दीक्षांत समारोह 13 जुलाई 2023 को आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने 1041 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की थी। चौथा दीक्षांत समारोह 23 अप्रैल 2024 को हुआ था, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 598 छात्र-छात्राओं को उपाधि वितरित की थी।