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Iपांच महीने पहले बना है भवन, अभी तक नहीं मिली मशीनI
एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में 9.50 लाख रुपये की लागत से बना कंपोनेंट सेंटर में ताला लटका है। सेंटर का भवन पांच महीने पहले बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के चलते अभी तक यहां कंपोनेंट सेपरेटर मशीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों को ब्लड नहीं मिलने से परेशान तीमारदारों को एम्स, हरिद्वार, जौलीग्रांट और देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है।
सरकारी अस्पताल में मरीज को खून के लिए इधर उधर न भटकना पड़े इसके लिए राष्ट्रीय हेल्थ मिशन योजना के तहत करीब 9.50 लाख रुपये की लागत से कंपोनेंट सेंटर बनाया गया। फरवरी 2023 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो जून 2023 तक पूरा हो गया। एनएचएम के विभागीय अधिकारी भवन का निरीक्षण कर चुके हैं। अभी तक यहां कंपोनेंट सेपरेटर मशीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। सेपरेटर मशीन न होने से ब्लड बैंक में सीमित मात्रा में ब्लड रहता है। पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण ब्लड बैंक भी रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं कर पा रहा है। इससे मरीज और तीमारदार परेशान होते हैं।
Iब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का ये फायदाI
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें लाल रक्त कणिकांए आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं डब्ल्यूबीसी प्लाज्मा, प्लेटलेट्स शामिल हैं। कंपोनेंट यूनिट मशीन में ब्लड से यह कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। इसका फायदा यह होगा की मरीज को जिस कंपोनेंट की जरूरत होगी उसे वही कंपोनेंट दिया जा सकेगा।
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Iअस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। - संजय जैन, सीएमओI