फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए एम्स को पहुंचाया छह करोड़ से अधिक नुकसान
चिकित्सा उपकरणों की खरीद की जांच के लिए पहुंची सीबीआई की टीम तब हैरत में रह गई, जब उसे तीन साल पहले खरीदी वेसल सीलिंग मशीन एक अन्य सहायक उपकरण के साथ पैक अवस्था में मिली। जिससे यह भी स्पष्ट हुआ कि खरीद का उद्देश्य फर्म को फायदा पहुंचाने और एम्स को नुकसान पहुंचाने का था।
एम्स ऋषिकेश में चिकित्सा उपकरणों की खरीद में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए 31 मार्च को सीबीआई और एससीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम पहुंची थी। आरोप था कि एम्स ऋषिकेश के अधिकारियों ने वर्ष 2019 और 2020 के दौरान उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों की अत्यधिक ऊंची कीमत पर खरीद की। जिससे एम्स ऋषिकेश को नुकसान हुआ और उस फर्म को गलत लाभ हुआ जो कभी भी बोली प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी। उपकरण की खरीद के लिए एम्स ने 24 अगस्त 2018 को निविदा जारी की थी।
निविदा 12 अक्तूबर 2018 को खोली गई थी और निम्नलिखित तीन फर्मों को प्रशासनिक मूल्यांकन के दौरान योग्य पाया गया था। लेकिन बाद में उपकरण ऐसी फर्म से खरीदे गए जिसने बोली प्रक्रिया में भाग ही नहीं लिया था। उपकरण जिस फर्म से खरीदे गए वह इसके लिए अधिकृत वितरक या डीलर भी नहीं थी। न ही कभी उक्त फर्म ने किसी चिकित्सा संस्थान को ऐसी कोई आपूर्ति की थी। उक्त फर्म केवल दवाओं की ही व्यापार करती थी। इस पूरी खरीददारी में एम्स को करीब छह करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।