पुलिस ने गंगा घाटों पर टप्पेबाजी की घटनाओं को अंजाम देने वाले अंतरराज्यीय टप्पेबाज गिरोह के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य गंगा घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान भटका कर उनका कीमती सामान चोरी करते थे। चारधाम यात्रा, कावड़ मेला व अन्य पर्वों के दौरान गिरोह के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं और हरिद्वार, ऋषिकेश सहित अन्य गंगा घाटों पर घटनाओं को अंजाम देते हैं।
बीते 11 मई को अमित जाटव पुत्र प्रकाश सिंह निवासी गंगानगर, ऋषिकेश ने कोतवाली में तहरीर दी। बताया कि वह अपने दोस्त विक्की पुत्र अशोक कुमार निवासी कुमारबाड़ा, ऋषिकेश के साथ त्रिवेणीघाट पर स्नान के लिए आया था। उन्होंने अपने कपड़े उतार कर घाट की सीढ़ियों पर रख दिए और स्नान करने लगे।
स्नान करके वापस आने पर उसकी पैंट की जेब से सात हजार रुपये, आधार कार्ड और दोस्त विक्की की पैंट की जेब से उसका आधार कार्ड व स्मार्ट वॉच अज्ञात व्यक्ति ने चोरी कर लिए थे।
वहीं 11 मई को ही अंकुर बिश्नोई पुत्र वाईके बिश्नोई निवासी मधु विहार, जमालपुर कला, हरिद्वार ने भी लिखित तहरीर दर्ज कराई। जिसमें बताया कि वह त्रिवेणीघाट पर स्नान करने के लिए आया था। स्नान के दौरान उन्होंने अपने कपड़े व बैग घाट पर बनी सीढ़ियों पर रख दिए थे। लेकिन किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका बैग चोरी कर लिया। जिसमें उनका मोबाइल फोन, छह हजार रुपये, आधार कार्ड व घड़ी रखे थे। दोनों तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धारा में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक एसएस बिष्ट ने बताया कि रविवार को पांच आरोपियों को नाव घाट के समीप व पांच अन्य आरोपियों को रेलवे रोड स्थित गुरुद्वारा के समीप से गिरफ्तार किया गया है। जिनके कब्जे से दोनों घटनाओं से संबंधित सामान भी बरामद हुआ है।
आरोपियों की पहचान लालचंद, राम शंकर, रामचंद्र, घनश्याम, कैलाश नाथ, राजेंद्र प्रसाद, रघु लाल, श्रवण कुमार, सत्रोहन, कोल्ही सभी निवासी गोंडा, उत्तर प्रदेश के रूप में की गई है।
अपराध का तरीका
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि धार्मिक यात्राओं के शुरू होने पर वह सभी गिरोह बनाकर देश के अलग-अलग स्थानों पर पहुंच जाते हैं और आसपास की धर्मशालाओं या अन्य जगहों पर कमरे किराए पर लेकर रहने लगते हैं। वह घाटों व भीड़भाड़ वाले स्थानों पर घूमते हैं और मौका देखकर स्नान करने या दर्शन करने वाले यात्रियों का ध्यान भटका कर उनका कीमती सामान चोरी कर लेते हैं। चोरी किए गए सामान को एकत्रित करने के बाद उसे आपस में बांट लेते हैं और अपने-अपने गांव वापस चले जाते हैं।