जौलीग्रांट। क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन हुई तेज बारिश, ओलावृष्टि और 64.8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने धान और गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। मंगलवार शाम हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद बुधवार शाम करीब चार बजे फिर मौसम बिगड़ गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी फसल गिर गई। किसानों ने प्रभावित फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
लगातार बारिश से खेतों की मिट्टी में नमी बढ़ने के कारण धान और गन्ने की फसलों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में तेज हवाएं चलने पर पौधे खेतों में गिर जाते हैं। गन्ने की फसल गिरने के बाद उसके टेढ़े-मेढ़े होने से चूहों और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, धान की फसल खेत में गिरने से पौधों के सड़ने और बालियों से दाने खेत में गिरने की आशंका रहती है।
किसान एवं सभासद अरुण सोलंकी ने कहा कि बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि और तेज हवाओं से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी से आए एक मौसमीय सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ के आपस में मिलने से क्षेत्र में मौसम में बदलाव आया है। एयरपोर्ट मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को हवाओं की अधिकतम रफ्तार 64.8 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।
बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 36 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद शाम साढ़े पांच बजे तक 10.4 मिलीमीटर अतिरिक्त वर्षा दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन हुई बारिश और तेज हवाओं से किसानों की चिंता बढ़ गई है।