अमित ग्राम में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब खाली वन भूमि की घेराबंदी करने पहुंची वन विभाग की टीम को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उग्र प्रदर्शन और तीखी नोकझोंक के कारण टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। इसी गहमागहमी और हंगामे के बीच उपप्रभागीय वनाधिकारी अनिल रावत की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया।
मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम अमित ग्राम में चिह्नित भूखंडों में तारबाड़ करने पहुंची। विभागीय टीम ने तारबाड़ के पिल्लरों के लिए खोदाई कर पिल्लर लगाने शुरू किए। इस कार्रवाई पर स्थानीय निवासियों ने कड़ा आक्रोश जताया। स्थानीय निवासियों का कहना था कि खाली भूमि पर फेंसिंग व चहारदीवारी बनाई गई है। इसके बाद तारबाड़ का कोई औचित्य नहीं है। आक्रोशित लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। सूचना पर स्थानीय पार्षद व अन्य लोग भी पहुंचे और विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। स्थानीय निवासियों के बढ़ते विरोध को देखते हुए वन विभाग ने तारबाड़ की कार्रवाई से हाथ पीछे खींच लिए।
स्थानीय पार्षद वीरेंद्र रमोला ने कहा कि अब किसी भी जमीन पर विभागीय तारबाड़ और बोर्ड नहीं लगाने दिया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने डीएफओ नीरज शर्मा से भी फोन पर वार्ता की है। विरोध प्रदर्शन करने वालों में पार्षद राजेंद्र सिंह बिष्ट, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा रविंद्र राणा, सत्य कपरुवाण, राजेश कोठियाल, दिनेश रावत आदि शामिल रहे।
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एसडीओ को अस्पताल ले गए अधिकारी
कार्रवाई के लिए टीम में शामिल उपप्रभागीय वनाधिकारी अनिल रावत की हंगामे के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिन्हें ऋषिकेश रेंजर गंभीर सिंह धमांदा अन्य साथियों के साथ उपचार के लिए उपजिला चिकित्सालय ऋषिकेश लाए।
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जिन चिह्नित भूखंडों पर पूर्व में तारबाड़ व चहारदीवारी की गई है, उन पर तारबाड़ न कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे भूखंडों पर सिर्फ विभागीय बोर्ड लगाए जाएंगे। जिन भूखंडों में तारबाड़ नहीं हैं, वहीं तारबाड़ की जानी हैं। मंगलवार को स्थानीय निवासियों के विरोध संबंधी घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। - नीरज शर्मा, डीएफओ, देहरादून वन प्रभाग