कार्तिक पूर्णिमा पर त्रिवेणीघाट में इस तरह स्नान के लिए पहुंचतीं हैं देवडोलियां। फाइल फोटो।
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ऋषिकेश। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच 30 नवंबर आयोजित होने वाले कार्तिक पूर्णिमा के स्नान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि (पूर्णिमा का दिन) पर स्नान के लिए हरिद्वार के बाद तीर्थनगरी में सबसे अधिक भीड़ जुटती है। दूसरी तरफ हरिद्वार जिला प्रशासन ने कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
30 नवंबर को होने वाले कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर त्रिवेणीघाट सहित अन्य घाटों पर भारी भीड़ जुटती है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान-पुण्य करने का महत्व है। इस दिन किसी पवित्र नदी अथवा जलकुंड में स्नान और दान-पुण्य के कार्य जरूर करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर राशि के अनुसार, दान करने से ग्रह मजबूत होते हैं। और कई प्रकार के अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। स्नान की तिथि नजदीक आने के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो अभी तक कोई गाइड लाइन जारी की गई है और न ही स्पष्ट किया गया है कि घाटों पर श्रद्धालुओं को स्नान की इजाजत होगी या नहीं। हालांकि पिछले दिनों दहशरा पर्व और छठ पूजा पर्व पर भी प्रशासन की ओर से घाटों पर श्रद्धालुओं के एकत्र होने पर रोक लगाई गई थी।
कोट:
अभी कार्तिक पूर्णिमा की तिथि दूर है। हालात को देखते हुए इस पर फैसला लिया जाएगा। हरिद्वार में अधिक भीड़ जुटती है, इसलिए वहां के प्रशासन ने जो फैसला लिया है, वह सही है। ऋषिकेश के परिपेक्ष्य में हम शीघ्र ही फैसला लेंगे। - डॉ. आशीष श्रीवास्तव, जिलाधिकारी, देहरादून