श्रीरामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में सीता जन्म व ताड़का वध लीला का मंचन किया गया। इस दौरान ताड़का वध के मंचन पर पांडाल तालियों से गूंज उठा। शुक्रवार को तीसरे दिन की रामलीला में राजा जनक के यहां अकाल पड़ रहा था। खेत खलिहान सब सूख चुके थे। जिसके बाद ऋषियों ने इस समस्या के समाधान को लेकर राजा जनक से पत्नी सहित खेत में हल चलाने को कहा। राजा जनक व उनकी पत्नी हल चलाते हैं। एक घड़े में से सीताजी निकलती हैं। जिनको राजा जनक अपने राजमहल ले आते हैं। दूसरी तरफ ऋषि विश्वामित्र राक्षसों की वजह से परेशान थे। ऋषि विश्वामित्र अयोध्या जाकर राजा दशरथ से राम, लक्ष्मण को मांगते हैं। राजा दशरथ कहते हैं कि मुझे ले चलिए। ऋषि विश्वामित्र राजा पर क्रोध करते हैं। कहते हैं कि राम, लक्ष्मण नहीं भेजे तो अयोध्या का नाश कर देंगे। दशरथ डरकर राम, लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। रास्ते में राम, लक्ष्मण ताड़का, सुभाऊ और अन्य राक्षसों का वध करते हैं। अहिल्या उद्धार मंचन के साथ ही तीसरे दिन की रामलीला का समापन हुआ। इस मौके पर कमेटी के कार्यकारिणी अध्यक्ष बहादुर सिंह, सचिव अजय साहू, उपाध्यक्ष पूरण मोघा, मनोज डंगवाल, संतोष शाह, अनिल डबराल आदि मौजूद रहे।