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Rishikesh News: महिला के गर्भाशय से निकाली साढ़े सात किलो की रसौली

Fri, 06 Feb 2026 02:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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आपरेशन मे ंशामिल चिकित्सकों की टीम: संवाद
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राजकीय उपजिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बृहस्पतिवार को एक महिला के गर्भाशय का जटिल ऑपरेशन कर लगभग साढ़े सात किलो की रसौली (गांठ) निकाली। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत में सुधार है।
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पौड़ी जनपद के कल्जीखाल निवासी बीना डबराल (45) को तीन वर्षो से पेट दर्द की शिकायत थी। जिसके उपचार के लिए वह कई अस्पतालों का चक्कर काट चुकी थी। लेकिन उपचार के बाद दोबारा पेट दर्द होने लगता था।

10 दिन पूर्व वह राजकीय उपजिला चिकित्सालय पहुंची, जहां वरिष्ठ सर्जन डॉ. लोकेश सलूजा ने महिला की जांच की। अल्ट्रासाउंड और दूसरी जांच कराने की सलाह दी। जांच में पता लगा कि महिला की बच्चेदानी में रसौली है।
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रसौली इतनी बड़ी थी कि पेट सात माह के गर्भ जैसा लग रहा था। महिला को रक्त की कमी के कारण तत्काल ऑपरेशन भी संभव नहीं था। ऑपरेशन से पूर्व महिला को 10 यूनिट रक्त चढ़ाया गया। बृहस्पतिवार सुबह करीब दो घंटे के जटिल ऑपरेशन से महिला के पेट से साढ़े सात किलो की रसौली निकाली गई। चिकित्सकों ने बताया कि जल्द महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

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...तो हो जाता कैंसर



डॉ. लोकेश सलूजा ने बताया कि जल्द ऑपरेशन नहीं किया जाता तो बच्चेदानी में कैंसर की आशंका थी। ऑपरेशन टीम में वरिष्ठ निश्चेतक डॉ. आनंद राणा, डॉ. लोकेश सलूजा, डॉ. राजीव गर्ग, स्टाफ नर्स नंदनी, संगीता, सीमा, सोबन, रेखा, बबली आदि शामिल रहे।



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क्यों होती है रसौली

डॉ. सलूजा बताते हैं कि गर्भाशय में रसौली मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन, विशेष रूप से एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि के कारण होती है। यह गैर-कैंसरयुक्त गांठें हैं जो आनुवंशिक कारणों, मोटापे, खराब जीवनशैली और 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में विकसित होने की आशंका रहती हैं। हालांकि ये कैंसर नहीं होती, लेकिन तेज दर्द या भारी ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।



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रसौली के सामान्य लक्षण



डॉ. सलूजा बताते हैं कि गर्भाशय में रसौली होने के सामान्य लक्षण श्रोणि क्षेत्र में दबाव या दर्द, मासिक धर्म का लंबे समय तक चलना या बार–बार होना, अत्यधिक रक्तस्राव या दर्द भरे मासिक धर्म, बार–बार पेशाब आना या पेशाब करने में परेशानी, पेट के निचले हिस्से में सूजन या उभार महसूस होना, कब्ज की समस्या, पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द, लंबे समय तक योनि से स्राव होना आदि हैं।
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