- ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत और लोकनृत्य का सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की
डोईवाला। कुमाऊं का पारंपरिक लोकपर्व सातूं-आठूं क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा है। ग्राम पंचायत सिमलास ग्रांट में बिरूड़ पंचमी से पर्व की शुरूआत हुई है। ग्रामीणों ने गौरा-महेश की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की। सिमालास ग्रांट के अलावा नांगल ज्वालापुर, नांगल बुलंदावाला और दूधली ग्राम पंचायत में भी उत्साह से पर्व मनाया गया। महिलाओं और पुरुषों ने कुमाउंनी वेशभूषा में सजकर लोकगीत और लोकनृत्य किया। ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व की खुशियां साझा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि मान्यता है कि गौरा माता भगवान महेश से नाराज होकर अपने मायके आती हैं। उन्हें मनाने के लिए भगवान महेश उनके मायके आते है। शिव-पार्वती मिलन और उन्हें मनाने की खुशी में सातूं-आठूं पर्व मनाया जाता है। दूसरी मान्यता यह भी है कि किसान अच्छी फसल होने की खुशी में लोकगीत और लोकनृत्य करते है। कुछ दिनों तक गौरा और महेश साथ रहते है और ग्रामीण विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर माता पार्वती को विदा करते है। कुमाऊं में इस पर्व को उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सुषमा बोरा, तुलसी देवी, मोहिनी, रीता देवी, हेमा देवी, बिमला देवी, गोविंदी, किरन बोरा, पूर्व प्रधान उमेद बोरा गोविंद सिंह, पृथ्वीराज कार्की, खड़क सिंह, चतर सिंह, किशन सिंह, पुष्कर सिंह बोरा और पुरोहित करन पंत आदि मौजूद रहे।