2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसम्बर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया। जिसके चलते यहां बाघों की संख्या पांच हो गई थी। जिसमें दो बाघ व तीन बाघिन शामिल थे। एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म भी दिया था, हालांकि चारों शावक बच नहीं पाए थे। अभी भी दो मादा व एक नर बाघ पार्क क्षेत्र में ही हैं। वहीं दो बाघिनें काफी लंबे समय से ट्रेस नहीं हो पा रही हैं। आशंका जताई जा रही हैं कि दोनों बाघिनें पार्क क्षेत्र से बाहर हिमाचल की सीमा में चली गई हैं। पार्क प्रशासन दोनों की लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास कर रहे हैं।
पूर्व में उम्मीदों को लगा था झटका
राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन नेशनल पार्क के पश्चिमी हिस्से में बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2024 में यहां बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया तो राजाजी प्रशासन को उम्मीदें भी जगीं, लेकिन इस कवायद को झटका तब लगा जब दो शावकों को गुलदार ने हमला कर शिकार बना लिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गुलदार के निशान सामने आए थे। हालांकि बाद में दो शावकों का भी पता नहीं चल पाया था।
बाघ विहीन था पश्चिमी क्षेत्र
राजाजी टाइगर रिजर्व में कुल 55 बाघ हैं। सभी बाघ पूर्वी क्षेत्र में हैं क्योंकि यह क्षेत्र नेशनल कार्बेट पार्क से जुड़ा हुआ है। पश्चिमी हिस्सा बाघ विहीन हो गया था। अत्यधिक मानवीय निर्मित अवरोधों के चलते बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था। राजाजी नेशनल पार्क गंगा के कारण पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बंटा हुआ है। पूर्वी क्षेत्र में तीन रेंज (गौरी, चोला व रवासन रेंज) और पश्चिमी क्षेत्र में सात रेंज (हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली व रामगढ़) हैं। पश्चिमी क्षेत्र में मानव निर्मित अवरोध सड़कें व चीला नहर आदि होने से यहां बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था जबकि यहां प्रचुर मात्रा में संसाधन हैं। यह क्षेत्र कहीं ज्यादा बाघों को वहन कर सकता है।
ये भी पढे़ं...देवप्रयाग: विधायक विनोद कंडारी का वाहन दुर्घटनाग्रस्त, बदरीनाथ हाईवे पर दूसरे वाहन ने मारी टक्कर, बाल-बाल बचे
- कर्मचारियों को बाघों की निगरानी, उनके पदचिह्न और अन्य प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संकेतों की पहचान करने के साथ ही कैमरा ट्रैप लगाने और आपसी समन्वय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। जल्द पांच और बाघों को यहां शिफ्ट किया जाएगा। -कोको रोशो, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क।