संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। भारतीय साहित्य संगम की ओर से एक साहित्यिक संगोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की गतिविधियों के संबंध में जानकारी दी।
वयोवृद्ध साहित्यकार शंभू प्रसाद भट्ट ने कविता का वाचन किया। उन्होंने वर्षा आई वर्षा आई, बाढ़ भूस्खलन भी साथ लाई, वर्षा ऋतु का देखो हाल, अस्त व्यस्त और सब बेहाल..., साहित्यकार मुक्तिनाथ त्रिपाठी ने कभी खुशनुमा यादों के साथ, कभी गमों के सैलाबों के बीच, नैनो में नीर लिए... डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बेटी ने ही मुझको ममता का एहसास कराया, मेरी प्रति छाया बनाकर बेटी ने ही मेरे मन को हर्षाया..., रामपुर, मुरादाबाद से कविवर शिव कुमार चंदन ने भक्त भगवान का संबंध सृष्टि कल से, भक्ति रचना सुनाकर सभा को भक्ति के रंग में रंग दिया। साथ ही बाल कविता झूम झूम कर बादल बरसे, पशु पक्षी जंगल में हर्षे... की प्रस्तुति दी। मनोज कुमार गुप्ता ने तमाम उम्र गुजर गई, तुम्हें संवारते निखारते, दो घड़ी सुकून ना मिला आराम के वास्ते..., डॉ. राजेश डोभाल ने मैं दिया हूं, झगड़ा मेरा है, अंधेरों से सदा, तू बेवजह ए हवा यूं न मेरे बीच में आ..., शिक्षक और साहित्यकार कृपाल सिंह शीला ने कुमाउंनी लोकगीत सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। इस मौके पर दीपक ध्यानी, संजय रावत, प्रेमलाल कंडवाल आदि शामिल रहे। कार्यक्रम में भारतीय वायु सेवा से सेवानिवृत्त हॉकी कोच और सामाजिक कार्यकर्ता देवेश्वर प्रसाद रतूड़ी ने सभी कवियों को स्मृति चिह्न देकर उनका आभार जताया।
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