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जन सुनवाई में हंगामा, तोड़फोड़, माइक फेंका

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स्वर्गाश्रम में जनसुनवाई के दौरान वन विभाग के विरुद्ध प्रदर्शन करते यमकेश्वर के ग्रामीण - फोटो : RISHIKESH
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यमकेश्वर विधानसभा के कुछ क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने के लिए जन सुनवाई को बुलाई बैठक में ग्रामीणों ने खूब हंगामा किया। ग्रामीणों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने कुर्सियां तोड़ डाली, माइक हवा में उछालकर जमीन पर पटक दिया और वन्यजीव प्रतिपालक अजय शर्मा और राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पीके पात्रों का घेराव कर वन विभाग प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। जन सुनवाई स्थल पर थोड़ी देर के लिए माहौल इतना गरमा गया मारपीट की नौबत आ गई। गनीमत यह रही कि वन अधिकारियों की सूझबूझ से हाथापाई टल गई। इसके बाद सभी ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए जन सुनवाई का बहिष्कार कर दिया।
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शुक्रवार को स्वर्गाश्रम में वन विभाग प्रशासन की ओर से राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन निर्धारण को लेकर जन सुनवाई का कार्यक्रम रखा गया था। इस मौके पर जन सुनवाई के लिए वन विभाग प्रशासन की ओर से मुख्य रूप से वन्य जीव प्रतिपालक अजय शर्मा, निदेशक पीके पात्रो और वन क्षेत्राधिकारी डीपी उनियाल मुख्य रूप से मौजूद थे। इस दौरान यमकेश्वर विधान सभा क्षेत्र के ग्रामीणों ने भारी संख्या में जन सुनवाई स्थल पर पहुंचकर वन प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाकर जमकर प्रदर्शन किया।
जन सुुनवाई स्थल पर पहुंचे यमकेश्वर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम सिमलडंडी, खैरगल, मौन, गदाणगांव, शंकराचार्य आश्रम, स्वर्गाश्रम, गोहरीघाट, जौंक, लक्ष्मणझूला, खरगोशा, भौन, कोठार, नीलकंठ, तोली, पुंडरासू, भादसी, मराल, सिमलखेत, रत्तापानी, करोंदी, मालाशेरा, सिरासू, कोटा, धौतिया, दुनारगांव, फूलचट्टी, पटना और हल्दोगी आदि लगभग 30 गांवों के ग्रामीणों ने क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल किए जाने का विरोध किया।
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इस मौके पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के रूप में गीता राणा व मीरा रतूड़ी ने कहा कि यहां की जनता इस बारे में कोई सुनवाई नहीं करेगी। खासकर वन विभाग प्रशासन की कोई बात नहीं सुनेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग प्रशासन पहले ही यमकेश्वर विधान सभा क्षेत्र के लोगों के साथ छल कर चुकी है। वन विभाग प्रशासन ने इको सेंसिटिव जोन का काला कानून यहां की जनता पर थोपा तो यहां की जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
गांवों के लिए विस्थापन का विकल्प भी मौजूद
वन्यजीव प्रतिपालक अजय शर्मा ने बताया कि इको सेंसिटिव जोन के तहत लगभग 55 गांव प्रभावित हो रहे हैं। पहले इसकी परिधि 10 किलोमीटर रखी गई थी लेकिन विरोध के चलते इसकी परिधि घटाकर दो किलो मीटर कर दी गई है। उन्होंने कहा कि 55 गांवों में से आज लगभभ 33 गांवों के जनप्रतिनिधियों को जन सुनवाई के लिए बुलाया गया था। जन सुनवाई के बाद इसकी रिपोर्ट एनजीटी को भेजी जानी है। इसके बाद कोर्ट जो भी निर्देश देगा उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के अंतर्गत जो भी ग्राम सभा पार्क के बाहर जाना चाहती है उसके विस्थापन की भी योजना है। ऐसे गांवों को विस्थापित किया जाएगा।
रायवाला और श्यामपुर क्षेत्र में भी विरोध
इससे पहले रायवाला और श्यामपुर के एक दर्जन से अधिक ग्रामीण क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल करने का विरोध कर चुके हैं। कुछ दिन पहले जन सुनवाई के लिए बुलाई बैठक में ग्रामीणों ने यहां भी विरोध प्रदर्शन किया था और जन सुनवाई बैठक का बहिष्कार कर दिया था। ग्रामीणों की मानें तो वह किसी भी कीमत पर इस कानून को लागू नहीं होने देंगे। श्यामपुर क्षेत्र के ग्रामीणों की ओर से आंदोलन शुरू करने के लिए इको सेंसिटिव जोन विरोधी संयुक्त संघर्ष समिति का गठन भी किया जा चुका है।

इको सेंसिटिव जोन को लेकर बुलाई गई बैठक में कुर्सी उठाकर हंगामा करते ग्रामीण- फोटो : RISHIKESH

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