पं. ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में उपस्थ
श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में अर्थशास्त्र विभाग की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विकसित भारत- 2047 के तहत भारत की आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति की दिशा विषय पर चर्चा की गई।
परिसर निदेशक और कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो. महावीर सिंह रावत ने कहा कि समावेशी विकास से ही समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण के बिना आर्थिक प्रगति अधूरी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. राकेश कुमार भट्ट ने कहा कि विकसित भारत 2047 केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समावेशन, समान अवसर और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है।
विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र प्रो. पुष्पांजलि आर्य ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना केवल तेज आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, समावेशी विकास और पर्यावरणीय संतुलन पर आधारित होनी चाहिए। वर्ष 2047 तक भारत को एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास, नवाचार और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है।कार्यशाला के संयोजक डॉ. अशोक कुमार मेंदोला ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया जाएगा। शोध छात्र छात्रा शिवानी निषाद ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और राष्ट्र निर्माण की समझ को सुदृढ़ करते हैं।