ऋषिकेश। सरकार से राहत न मिलने से नाराज होटल इंडस्ट्री ने ऋषिकेश से गोवा, हिमाचल और केरल पलायन करने की तैयारी शुरू कर ली है। होटल इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि प्रदेेश सरकार ने होटल इंडस्ट्री को ऑपरेटर्स और ओनर्स के भरोसे छोड़ दिया है। पहले लॉकडाउन और अब कोविड कर्फ्यू के दौरान होटल ऑपरेटर्स और ओनर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन सरकार ने होटल ऑपरेटर्स और ओनर्स की मदद के लिए अब तक कोई पहल नहीं की है। उधर, गोवा, हिमाचल और केरल में सरकार होटल ऑपरेटर्स और ओनर्स की मदद कर रही है। ऐसे में अगर होटल इंडस्ट्री ऋषिकेश से पलायन करती है तो इसका पर्यटन उद्योग पर बड़ा असर पड़ेगा। होटल इंडस्ट्री से सरकार को मिलने वाला राजस्व भी अन्य राज्यों की झोली में चला जाएगा।
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लीजधारकों की जुबानी
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- लगातार दूसरे साल सीजन में कोविड कर्फ्यू लगने के कारण अधिकांश लीजधारक परेशान हैं। इस बार स्थिति यह है कि न तो वे बैंक की किश्त जमा कर पा रहे हैं और न ही अन्य खर्चे। ऐसे में कई लीजधारक होटल बंद कर अपने घर चले गए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से होटल इंडस्ट्री की कोई मदद नहीं की जा रही है। ऐसे में यहां से आधे से अधिक लीजधारक गोवा, हिमाचल और केरल जाने की तैयारी कर रहे हैं।
-संदीप कुमार, तपोवन
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प्रदेश में 80 प्रतिशत होटल लीज पर चलते हैं। लगातार दूसरे साल यात्रा सीजन में कोविड कर्फ्यू होने के कारण होटल बंद करने पड़े हैं। पिछले साल तो होटल स्टाफ को आधा वेतन दिया गया था, इस बार पूरे होटल स्टाफ की भी छुट्टी कर दी गई है। इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग बेरोजगार हो गए हैं। होटल स्वामियों ने सिक्योरिटी राशि जब्त कर दी है। सरकार से बिजली, पानी, जीएसटी, बैकों की किश्त माफ करने की मांग की जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
-प्रवेश जोशी, लक्ष्मणझूला
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पिछले साल होटल व्यवसायियों ने सरकार से बिजली के बिजली में फिक्सड चार्ज माफ करने की मांग की, आश्वासन मिला। लेकिन बाद में बिजली के भारी भरकम बिल आए। प्रदेश सरकार की ओर से होटल इंडस्ट्री की किसी प्रकार की सहायता नहीं की जा रही है। ऐसे में होटल व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति उत्तराखंड को छोड़कर ऐसे राज्यों में व्यवसाय करेगा, जहां पर उसे वहां की सरकार कुछ मदद भी कर सके।
-मयंक शर्मा, तपोवन
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इनसेट
बड़े होटल्स नहीं आ पा रहे उत्तराखंड
होटल व्यवसायी संदीप कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में पर्यटन को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। जो भी घोषणाएं होती हैं, वह भी धरातल पर नहीं आती। राज्य बनने के 20 साल बाद भी एक होटल को छोड़कर उत्तराखंड में कोई नामी होटल नहीं आ पाया। यदि सरकार की ओर से पर्यटन विभाग को सब्सिडी और अन्य सुविधाएं दी जातीं तो आज प्रदेश में नामी होटल होते।
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होटल को क्वारंटीन सेंटर बनाया, किराया नहीं दिया
संदीप कुमार ने बताया कि पिछले साल टिहरी जिला प्रशासन की ओर से उनके होटल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। होटल के कमरों का भी किराया तय हो गया था। पूरा एक साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी टिहरी जिला प्रशासन की ओर से होटल का किराया नहीं दिया गया।