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Rishikesh News: राजाजी पार्क में एक और बाघिन को लाने की तैयारी

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I- पार्क के अधिकारियों ने किया टाइगर बाड़े का निरीक्षण
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I- ढेला नॉन टूरिज्म क्षेत्र में एक मादा बाघिन को किया गया है ट्रेंकुलाइजI

राजाजी पार्क में एक और बाघिन को लाने की तैयारी चल रही है। जिसके बाद बाघों का कुनबा और बढ़ जाएगा। कॉर्बेट पार्क में बाघिन को ट्रेंकुलाइज किया जा चुका है। परीक्षण के बाद जल्द ही उसे मोतीचूर रेंज में लाया जाएगा। इसको लेकर पार्क प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है। पार्क के आला अधिकारियों ने यहां बने टाइगर बाड़े का निरीक्षण भी किया है।



जानकारी के अनुसार कॉर्बेट की ढेला नॉन टूरिज्म क्षेत्र में एक मादा बाघिन को ट्रेंकुलाइज किया गया है। कॉर्बेट के पशुचिकित्सक डॉ. दुष्यंत व उनकी टीम पिछले कई दिनों से इस अभियान में लगी हुई थी। पकड़ी गई बाघिन की उम्र तीन से चार वर्ष के बीच है और वह पूर्णतया स्वस्थ है। इसे रेस्क्यू कर ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। जहां उसका परीक्षण किया जा रहा है।
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राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के ट्रांसलोकेट करने की योजना कुछ वर्ष पूर्व शुरू की गई थी। इस योजना के तहत यहां पांच बाघों को ट्रांसलोकेट किया जाना है। वन्यजीव प्रतिपालक हरीश नेगी ने बताया कि मोतीचूर रेंज में अब तक दो मादा व एक नर बाघ लाए जा चुके है। जो यहां के वातावरण में घुल मिल गए हैं। अब जल्द ही चौथी बाघिन भी यहां पंहुचेगी। उन्होंने बताया कि टाइगर बाड़े में फूस लगाकर नेचुरल वातावरण में तब्दील कर दिया गया है। शनिवार को पार्क पार्क निदेशक साकेत बडोला, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा ने टाइगर बाड़े का निरीक्षण किया।

गौरतलब है कि पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में मोतीचूर, चीलावाली, कांसरो, धौलखण्ड, बेरिवाडा, रामगढ़ व हरिद्वार रेंज आती है। यह क्षेत्र बाघों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर बेहतर माना गया है। हालांकि अभी तक कॉर्बेट से लाए गए बाघ प्रजनन करने में नाकाम रहे है। ऐसे में उम्मीद है कि नई बाघिन के आ जाने से यहां बाघों के कुनबे में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
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Iक्या है खासI



टाइगर बाड़ा एक हेक्टेयर के क्षेत्रफल में बना है। यहां सात सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनके माध्यम से टाइगर की हर मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा यहां बाड़े के बाहर सोलर फेंसिंग लगाई गई है। साथ ही टाइगर बाड़े में एक प्रवेश द्वार के अलावा दो निकासी द्वार बनाया गया है। टाइगर बाड़े को जंगल की वास्तविक स्वरूप में बदल दिया गया है ताकि यहां छोड़े जाने वाली बाघिन यहां के वातावरण में जल्द ही ढल सके।
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