त्रिवेणीघाट, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, मुनि की रेती, आईडीपीएल, श्यामपुर, रायवाला आदि जगहों पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नगर क्षेत्र के गलियों, चौराहे और तिराहों पर लोगों ने लकड़ी की डांटे एकत्रित किए। सुबह से देर शाम तक लोगों ने पूजा-अर्चना की। होलिका की परिक्रमा कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। बैंडबाजे और भांगड़े के धुन पर लोगों ने एक-दूसरे को अबीर, गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। रात करीब 11:30 बजेे के बाद होलिका दहन किया गया।
पंडित सुमित गौड़ ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह 10 बजकर 38 मिनट से भद्राकाल शुरू हुआ, जो रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहा। उसके बाद होलिका दहन किया गया। भद्रकाल समाप्त होने के बाद होलिका दहन किया जाता है। भद्राकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। होलिका दहन भी एक तरह का शुभ कार्य माना जाता है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन की कहानी भक्त प्रहलाद और असुर हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। इसी घटना को याद करते हुए हर साल होलिका दहन किया जाता है।