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Rishikesh News: बार-बार रेलवे फाटक बंद होने से हजारों की आबादी परेशान

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प्रतीत नगर, रायवाला और गोहरी माफी ग्राम पंचायतों को मुख्य हाईवे से जोड़ने वाले मार्ग पर बना रेलवे फाटक यहां के ग्रामीणों के लिए मुसीबत बना हुआ है। ग्रामीणों ने विकल्प के रूप में इंटर कॉलेज से मुर्गी फार्म होते हुए पुराने हाईवे तक पहुंचने वाले खस्ताहाल मार्ग को पक्का किए जाने की मांग की है।
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न्याय पंचायत श्यामपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत प्रतीत नगर, रायवाला, खांड गांव और गोहरी माफी के ग्रामीणों ने एक बार फिर रायवाला रेलवे फाटक से होने वाली समस्याओं के निराकरण की मांग उठाई है। रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज बनाए जाने की मांग स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से की जा रही है, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं ले लिया जाता तब तक विकल्प के रूप में इंटर कॉलेज से मुर्गी फार्म होते हुए मिडवे रेस्टोरेंट तक पहुंचने वाले मार्ग को पक्का किया जाए ताकि यहां की जनता को फाटक की समस्या से निजात मिल सके।
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बता दें कि रेलवे फाटक से करीब 50 हजार की आबादी परेशान हैं। दिन भर में यह फाटक 50 से अधिक बार बंद होता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ ड्यूटी पर जाने वाले लोगों और स्कूल के छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।



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- मामला केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है। मैंने पहले भी इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष रखा था। प्रयास है कि क्षेत्र के ग्रामीणों को इस समस्या से निजात दिलाई जा सके। फिलहाल वैकल्पिक मार्ग के कुछ हिस्से को पक्का किया गया है बाकी छूटे हुए मार्ग को जल्द पक्का किया जाएगा। - प्रेमचंद अग्रवाल, क्षेत्रीय विधायक व शहरी विकास मंत्री



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- हाल ही में जिला योजना से उक्त वैकल्पिक मार्ग के कुछ हिस्से पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई गई है, जिससे ग्रामीणों को कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन इसी मार्ग का कुछ हिस्सा अभी क्षतिग्रस्त पड़ा है। जिसपर जल्द ही कार्य शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। - राजेश जुगलान, सदस्य जिला योजना समिति



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- हमें दिन भर में कई बार फाटक से गुजरना होता है लेकिन यह फाटक अधिकांश समय बंद ही मिलता है। ट्रेनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जिससे ग्रामीणों की समस्याएं और बढ़ रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण एकजुट होकर बड़े आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। -अजय साहू, सामाजिक कार्यकर्ता
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