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समरस समाज के निर्माण में सहभागी बनें : चिदानंद

Mon, 09 Feb 2026 07:29 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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ऋषिकेश। मां जानकी के प्राकट्य दिवस पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ का आयोजन किया। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने विश्व शांति और समृद्धि के लिए विशेष यज्ञ किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मां जानकी, धैर्य की वह निशब्द शक्ति हैं जो हर पीड़ा को तप बनाकर प्रकाश में बदल देती है। मां जानकी भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। वे नारी गरिमा, संयम, करुणा और आंतरिक शक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। उनका जीवन संघर्षों से भरा था, किंतु उन्होंने कभी अपनी मर्यादा, करुणा और धैर्य का त्याग नहीं किया। यही कारण है कि वे सनातन संस्कृति में आदर्श नारीत्व की सर्वाेच्च प्रतीक हैं। जानकी प्राकट्य दिवस आत्मचिंतन और जीवन मूल्यों को दोबारा जागृत करने का पावन अवसर है। मां जानकी के आदर्शों को आत्मसात कर एक संवेदनशील, संस्कारित और समरस समाज के निर्माण में सहभागी बनें।
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