किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन अभियान उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। विभागीय दावों और प्रचार-प्रसार के बावजूद तीन माह में महज 59 किशोरियों का ही टीकाकरण हो पाया है। ऐसे में अब अभियान की रणनीति और व्यवस्था दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैक्सीनेशन के लिए तय की गई आयु सीमा सबसे बड़ी बाधा बन रही है। वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं किशोरियों को यह टीका लगाया जा रहा है जिनका 14वां वर्ष शुरू हो चुका हो और 15वां वर्ष पूरा होने से पहले टीकाकरण कराया जाए। इस सीमित दायरे के कारण बड़ी संख्या में किशोरियां अभियान से बाहर रह जा रही हैं।
दूसरी ओर, टीके को लेकर फैली अफवाहें भी अभियान की राह में बड़ी रुकावट बन रही हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई अभिभावक अब भी टीके को लेकर भ्रम की स्थिति में हैं। कुछ लोग इसके दुष्प्रभावों को लेकर आशंकित हैं, जबकि कई परिवारों तक सही जानकारी पहुंच ही नहीं पाई है। स्थिति यह है कि राजकीय उपजिला चिकित्सालय में बीते तीन माह में मात्र 59 किशोरियों को ही यह टीका लग पाया है। जबकि विभाग की टीम स्कूलों के साथ ही घर-घर जाकर प्रचार-प्रसार भी कर रही हैं।
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एचपीवी टीकाकरण के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। अधिक से अधिक किशोरियों को टीका लगे इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. एएस राणा, सीएमएस, राजकीय उपजिला चिकित्सालय ऋषिकेश