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बीच कैंपों के बंद होने से घटी पर्यटकों की संख्या

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मुनिकीरेती। गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति ने बीच कैंपों का संचालन ठप होने से चिंता व्यक्त की है। व्यवसायियों का कहना है कि बीच कैंपों का संचालन बंद होने से पर्यटकों की संख्या में 60 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
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मुनिकीरेती स्थित कार्यालय में रविवार को समिति के अध्यक्ष दिनेश भट्ट की अध्यक्षता में सभी राफ्टिंग व्यवसायियों की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान राफ्टिंग व्यवसायियों ने ऋषिकेश में घटती पर्यटकों की संख्या पर चिंता व्यक्त की। समिति अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने कहा कि ऋषिकेश को राफ्टिंग, कैंपिंग और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में सुरक्षित स्थान माना जाता है। राफ्टिंग और कैंपिंग व्यवसाय के साथ हजारों स्थानीय बेरोजगार को रोजगार मिल रहा था। 2015 में एनजीटी ने बीच कैंपों पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी थी। वर्ष 2016 में एनजीटी ने राज्य सरकार को बीच कैंपों की स्पष्ट नीति बनाकर व्यवसायियों को बीच कैंपों को पूर्व भांति देने को कहा था। चार वर्ष बीत जाने के बाद भी व्यवसायियों को बीच कैंप संचालन की अनुमति नहीं मिल पाई है। बीच कैंप बंद होने से प्रदेश में आने वाले पर्यटकों में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आ गई है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में आकलन किया जाए तो बीच कैंपों के बंद होने से राफ्टिंग कैंपिंग व्यवसायियों के साथ ही हजारों स्थानीय युवा बेरोजगार हो गए हैं। यदि अभी भी सरकार बीच कैंपों के संचालन की अनुमति नहीं देती है तो 40 प्रतिशत राफ्टिंग कैंपिंग का जो व्यवसाय बचा है वह भी जल्द खत्म हो जाएगा। इस अवसर पर विकास भंडारी, हुकम रावत, रामपाल भंडारी, मदन बडोनी, हेमंत चौहान, मनोज उनियाल, प्रदीप काकरान, धनवीर भंडारी, अनुराग रावत आदि मौजूद रहे।
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