नोटबंदी को 46 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक अधिकतर बैंक और एटीएम कैशलेस हैं। गिने-चुने एटीएम पर लंबी कतारें हैं और सिर्फ दो हजार रुपये ही निकल रहे हैं। बैंक सिर्फ अपने ग्राहकों को कैश दे रहे हैं। बैंक और एटीएम से पर्याप्त रुपये न मिलने से विदेशी पर्यटक खासे परेशान हैं।
रुपये न होने की वजह से तीर्थ नगरी घूमने आए विदेशी पर्यटक स्वदेश लौटने लगे हैं। अमूमन तीर्थ नगरी सालभर विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहती है। पर्यटकों के लौटने की वजह से तीर्थ नगरी लक्ष्मण झूला, स्वर्गाश्रम और तपोवन क्षेत्र के दुकानदार परेशान हैं।
स्थानीय अभिसूचना इकाई के आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष की अपेक्षा इस साल विदेशी पर्यटकों की संख्या में 50 फीसदी गिरावट आई है। दरअसल पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोट चलन से बाहर होने के बाद से हर वर्ग परेशान है। 46 दिन से आम जनता एटीएम की लाइन में लग रही है, लेकिन राहत नहीं मिल रही है।
इसका असर तीर्थ नगरी में भी देखा जा सकता है। बैंकों से रुपये नेे मिलने और एटीएम खाली होने से स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी पर्यटक भी परेशान हैं। ऐसे में उन्हें तीर्थ नगरी छोड़कर जाना पड़ रहा है। विदेशी पर्यटकों के पलायन से स्थानीय व्यापारी मायूस हैं।
मुनिकीरेती अभिसूचना ईकाई के रिकार्ड के मुताबिक नवंबर 2015 में लक्ष्मण झूला, तपोवन में विदेशी पर्यटकों की संख्या 1600 और दिसंबर में 914 थी। नवंबर 2016 में विदेशी पर्यटकों की संख्या 1352 और दिसंबर महीने के अब तक 600 है। दिसंबर में करीब 314 पर्यटकों में कमी आई है।
लक्ष्मण झूला अभिसूचना इकाई के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। नवबंर 2015 में लक्ष्मण झूला,स्वर्गाश्रम क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या 1000 और दिसबंर में 800 थी। नवंबर 2016 में विदेशी पर्यटकों की संख्या 550 और दिसंबर में 300 रह गई है।
ब्राजील निवासी मैनी और एंजिलिना ने बताया कि वह तीर्थ नगरी लक्ष्मण झूला में योग की शिक्षा लेने आए थे। यहां नोटबंदी के कारण वह इसका लाभ नहीं उठा पाए। घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी एटीएम से केवल दो हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं। कई बार तो एटीएम कैशलेस हैं। सर्वर डाउन से ई-पेमेंट प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। इस स्थिति में सुधार होने के बाद मौका मिलेगा तो वह दोबारा तीर्थनगरी आएगी।