राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर चंद्रभागा नदी तट पर बसे लोगों को हटाने की कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसके तहत सभी 350 परिवारों को नोटिस भेजा जा चुका है। बुधवार को निगम में सुनवाई भी आयोजित होने वाली है। इसके बावजूद नदी तट पर बसे परिवार टस से मस होने को तैयार नहीं हैं। लोगों का कहना है कि उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। यदि प्रशासन ने जोर जबरदस्ती की तो वह निगम परिसर में परिवार के साथ डेरा डालेंगे। अन्यथा उन्हें बेघर करने से पहले ठौर दिया जाए।
चंद्रभागा बस्ती में हो रहे अतिक्रमण पर कुछ समय पहले एनजीटी ने नगर निगम के अधिकारियों को जांच करने के आदेश दिए थे। इस दौरान तट पर बसे लोगों को हटाने के लिए सख्त निर्देश दिए गए। इसके बाद नगर निगम की टीम ने नदी तट पर बसे लगभग 350 अवैध कब्जे चिह्नित कर लोगों को नोटिस जारी कर 24 जुलाई तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है। तय समय सीमा की अवधि लगभग पूरी होने को है, लेकिन अतिक्रमणकारियों पर नोटिस का कोई प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है।
नगर निगम भी सुनवाई की समय सीमा पूरी होने का इंतजार कर रहा है। समय सीमा पूरी होने के बाद ही इस अवैध बस्ती को हटाने में स्थानीय प्रशासन कहां तक सफल होता है यह तो 24 जुलाई के बाद ही देखने को मिलेगा। चंद्रभागा पुल के नीचे अभी भी दर्जनों परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं। फिलहाल नदी का जल स्तर इन झोपड़ियों के कुछ ही दूरी पर है। अचानक तेज बारिश होने से नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन लोगों को खतरा पैदा हो सकता है। नदी के तट पर बसे दर्जनों परिवार अभी भी नदी के तट से हिलने को तैयार नहीं हैं।
कोट्स
चंद्रभागा नदी के किनारे 350 अवैध कब्जों का चिह्नित किया जा चुका है। अवैध रूप से बसे इन लोगों को खाली करने के लिए 24 जुलाई तक का नोटिस दिया गया है। अतिक्रमण को हटाने के लिए 24 जुलाई को नगर निगम में बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के पास ऐसे लोगों के विस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं है। इन लोगों को अपनी व्यवस्था खुद करनी होगी।
- चतर सिंह चौहान, मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम ऋषिकेश