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एनजीटी का केंद्र-राज्य सरकार को नोटिस

Sat, 23 Apr 2016 03:37 AM IST
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश
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एनजीटी का केंद्र-राज्य सरकार को नोटिस - फोटो : filephoto
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सुप्रीमकोर्ट की ओर से गठित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में बसे गांवों के पुनर्वास और राहत के मामले में केंद्र और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर 10 मई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार (22 अप्रैल) को एक जनहित याचिका के आधार पर एनजीटी ने यह कार्रवाई की।
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उधर, कार्रवाई पर याचिकाकर्ता का कहना है कि पार्क प्रशासन ने पांच साल पहले यह तो स्वीकार किया कि उक्त गांवों को टाइगर रिजर्व के कोर जोन में अधिकार देना उचित नहीं है, लिहाजा इनका विस्थापन ही विकल्प है। बावजूद इसके ग्रामीणों को राहत और गांवों के विस्थापन के लिए कुछ नहीं किया गया।


बता दें कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की गौहरी रेंज के अंतर्गत ऐसे कई गांव हैं जहां पर लोग निवास कर रहे हैं। नियमानुसार राजाजी नेशनल पार्क और अब टाइगर रिजर्व पार्क के अंतर्गत वन्यजीव और मानव संघर्ष के मद्देनजर गांवों में बसासत नहीं हो सकती है। इसके बावजूद यहां गांवों में पार्क के कोर जोन में तीन दशक से अधिक समय से लोग निवास कर रहे हैं।
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इस मामले में साल 2011 में सामाजिक कार्यकर्ता मदन सिंह बिष्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2012 को उन्हें मामले को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित ट्रिब्यूनल के समक्ष रखने को कहा था। बिष्ट ने न्यायालय के आदेश पर 16 मार्च 2016 को एनजीटी में याचिका दायर की थी। शुक्रवार को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजकर 10 मई तक जवाब मांगा गया है।


याचिकाकर्ता बिष्ट के अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने केंद्र और राज्य सरकार से राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की गौहरी रेंज के अंतर्गत पड़ने वाले राजस्व तोक सिमालडंडी, गुदाणगांव, मौबण, धोतिया आदि में रहने वाले लोगों के पुनर्वास और राहत के मामले में सरकार की ओर से की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है।
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