नई व्यवस्था के तहत न्याय पंचायत स्तर पर सरकारी बीज वितरण केंद्रों पर खरीफ की फसलों के बीज काश्तकारों ने बाजार मूल्य पर खरीदना शुरू कर दिया है, लेकिन उनको सरकार की ओर से दी जाने वाली अनुदान राशि नहीं मिल पा रही है। इसका कारण विभाग के पास काश्तकारों के बैंक खाते न होना है।
इतना ही नहीं अफसरों को अब तक यह भी नहीं पता कि कितने प्रतिशत अनुदान राशि बैंक खातों में भेजी जाएगी। जिसको लेकर क्षेत्र के छोटे काश्तकारों में विभाग के प्रति नाराजगी है। उन्होंने नई व्यवस्था को सही ढंग से संचालित करने की मांग की है।
नई व्यवस्था के तहत किसानों के बैक खातों में बीज पर सरकार की ओर से दी जाने वाली अनुदान राशि भेजी जानी है। जबकि अभी यह स्पष्ट जानकारी भी अफसरों के पास नहीं है कि काश्तकारों को कितनी फीसदी छूट रकम खातों में भेजी जाएगी। मगर बताया गया कि सरकार द्वारा यह कदम किसानों तक छूट की रकम पहुंचाने के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए उठाए गए हैं। दूसरी ओर सुुदूर क्षेत्रों से केंद्र में पहुंच रहे काश्तकारों ने सरकार की इस नई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र नेगी, खांडगांव के कमान सिंह रावत, प्रतीतनगर के महेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि पुरानी व्यवस्था के तहत छोटे किसानों को बीज खरीद में तत्काल कम रकम बीज उपलब्ध हो जाता था, किंतु नई व्यवस्था के तहत काश्तकारों को बाजार मूल्य पर रकम देने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में श्यामपुर क्षेत्र में छोटी कृषि भूमि के काश्तकार रह गए हैं, जिनके खातों में छूट की रकम बहुत कम पहुंचेगी, उक्त योजना का लाभ वास्तविक तौर पर बड़े काश्तकारों को मिलना है, जबकि छोटे काश्तकारों पर योजना को थोपकर उनकी फजीहत कराई जा रही है।
इनका कहना है
बताया कि बीज खरीदने पहुंच रहे कास्तकारों से उनके फोन नंबर और बैंक खाता संख्या ली जा रही है और बाजार मूल्य पर खरीफ और दलहन बीज बिक्री किया जा रहा है।
पीएस लुठियागी, सहायक कृषि अधिकारी, प्रभारी, रायवाला केंद्र प्रभारी