चार दशक से ही एक संचालक ने संभाली है मोटर बोट की जिम्मेदारी
वर्ष 1980 से लेकर अब तक एक ही बोट संचालक इसकी जिम्मेदारी संभाल रहा है। जबकि हर तीन साल में गंगा में बोट के संचालन की टेंडर प्रक्रिया होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब रामझूला नहीं था तब स्थानीय आश्रमों की ओर से एक छोर से दूसरी छोर जाने के लिए बोट का संचालन किया जाता था। तब आश्रम की यह बोट निशुल्क थी। वर्ष 1980 में इस पर टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। तीन साल इसकी जिम्मेदारी टिहरी और तीन साल इसकी देखरेख पौड़ी प्रशासन करता है।
मामला संज्ञान में नहीं है, यदि ऐसा है तो विभागीय कर्मचारियों को निर्देशित कर जल्द ही इसकी जांच की जाएगी। सत्यता मिलने पर बोट संचालक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुनील कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत पौड़ीI