परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आयोजित कथावाचक जया किशोरी की नानी बाई को मायरो कथा के दूसरे दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया। उन्होंने कहा कि कहा कि मां का वात्सल्य और ममता दुनिया में सबसे अद्भुत है। मां का मीठा-मीठा बोलना और उनकी ममता बच्चों को सुरक्षा व प्रेम का अहसास कराती है।
सोमवार को कथावाचक जया किशोरी ने नानी बाई को मायरो कथा के दौरान भक्ति की महिमा बताई। कहा कि एक भक्त का अपने ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम कितना मजबूत होता है, यही संदेश हमें नानी बाई को मायरो से मिलता है।
नरसी मेहता एक महान भक्त और संत थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। लेकिन उनका प्रभु के प्रति विश्वास कभी नहीं डगमगाया। नरसी मेहता के पास धन की कमी थी और समाज व परिवार ने भी उनका कई बार तिरस्कार किया। लेकिन उनकी भक्ति और विश्वास ने उन्हें हमेशा मजबूत बनाए रखा। एक बार जब उनके पिता के श्राद्ध के लिए घी की आवश्यकता थी, तो भगवान कृष्ण ने स्वयं नरसी मेहता का रूप धारण कर घी लाकर दिया।
उनकी बेटी नानी बाई की बेटी के विवाह में मायरा भरने के लिए उनके पास धन नहीं था। लेकिन भगवान कृष्ण ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं मायरा भरा और विवाह को सफल बनाया। नरसी मेहता का जीवन एक प्रेरणा है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं।
जया किशोरी ने एक अन्य प्रसंग सुनाया कि एक बार नरसी मेहता को एक धार्मिक आयोजन में आमंत्रित किया गया था। जहां उन्हें कीर्तन करना था। आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने नरसी मेहता की भक्ति की परीक्षा लेने का निर्णय लिया।
उन्होंने नरसी मेहता से कहा कि यदि उनकी भक्ति सच्ची है, तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उन्हें हार पहनाएंगे। नरसी मेहता ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की और कीर्तन में लीन हो गए। उनकी भक्ति और प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर नरसी मेहता के गले में हार डाल दिया।