रानीपोखरी में बाग में आम की फसल दिखाता बागवान।
- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। पिछले वर्ष 40 रुपये बिकने वाला आम इस वर्ष 10-15 रुपये में भी नहीं बिक रहा है। फसल तैयार खड़ी है, लेकिन खरीददार नहीं हैं। लॉकडाउन के कारण बागवान परेशान हैं। उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि उनकी लागत भी निकल पाएगी या नहीं। अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं, नहीं तो फसल बाग में ही खराब हो जाएगी।
डोईवाला, रानीपोखरी, थानों, श्यामपुर रायवाला आदि गांव अपने बाग-बगीचों के लिए ही जाने जाते हैं। लिची की फसल तो समय पर निकल गई, लेकिन आम की फसल पर लॉकडाउन लग गया। स्थिति ये है कि बागों में फसल पेड़ों पर ही पककर झड़ रही है, लेकिन कभी मंडी बंद होने तो तो कभी लॉकडाउन की वजह से फसल ग्राहकों तक पहुंच ही नहीं पा रही है। लोकल का आम लोकल में भी नहीं खप पा रहा है। बागवान चंद्रपाल, भुट्टू, फुरकान, गंगाराम आदि ने बताया कि उन्होंने ठेके पर बगीचे लिए थे, लेकिन अब स्थिति ये है कि खर्च भी निकलता नहीं दिखाई दे रहा है। अब तक सारी फसल निकल जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार सैकड़ों किलो आम झड़कर पेड़ों के नीचे ही सड़ रहा है। कुछ लोग बेहद कम दामों में बाग से ही खरीद रहे हैं। हम भी यह सोचकर कम दाम में बेच दे रहे हैं कि खराब होने से तो अच्छा है कोई खा ही ले। उन्होंने सरकार से बागवानों को आर्थिक मदद देने की मांग की है। इधर, मंडी आढ़त विक्रेताओं के अध्यक्ष अनिल खुराना का कहना है कि इस बार आम की पैदावार बहुत अच्छी हुई है, लेकिन छोटे आम की बिक्री इस बार कम है, वह काला पड़कर जल्दी खराब भी हो रहा है। लॉकडाउन का भी असर पड़ा है, जिसकी वजह से बाहर का व्यापारी भी आम नहीं उठा पा रहा है।