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Rishikesh News: लगातार बारिश से बढ़ा भूस्खलन का खतरा, नीलकंठ यात्रा मार्ग पर प्रशासन अलर्ट

Thu, 06 Aug 2026 05:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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07- बैरागढ़ गांव। संवाद
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- बैरागढ़ गांव झेल चुका कई दंश, कुत्ता काटली गदेरे में मलबे से फिर बढ़ी चिंता
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-मौसम विभाग के अलर्ट से दहशत, कांवड़ यात्रा के चलते प्रशासन अलर्ट
-नीलकंठ कांवड़ यात्रा के बीच प्रशासन अलर्ट, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी
- मानसून की मार जारी, बारिश से राहत भी और चिंता भी
- बैरागढ़, जुलेड़ी, बिंजाखेत समेत कई संवेदनशील गांवों में बढ़ी चिंता, यात्रा मार्ग पर जेसीबी तैनात कर निगरानी तेज
- 25 जून के बाद से लगातार बारिश, अगस्त में भी नहीं थमा सिलसिला
यमकेश्वर। लगातार हो रही बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 25 जून के बाद जुलाई में लगभग हर दिन हुई बारिश के बाद अब अगस्त में भी लगातार बरसात जारी है। मौसम विभाग की ओर से मोबाइल पर भेजे जा रहे भारी बारिश के सतर्कता संदेशों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
लगातार हो रही बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं, पहाड़ी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बारिश के कारण चट्टान खिसकने और मार्ग प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लोग भी सतर्कता बरत रहे हैं। नीलकंठ कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन यात्रा मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी है। नीलकंठ यात्रा मार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मलबा हटाकर मार्ग सुचारु किया जा सके। पुलिस और प्रशासन की टीमें भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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इन गांवों में सबसे ज्यादा डर
बीते कई वर्षों में हुए भूस्खलन व बादल फटने जैसी घटनाओं से बैरागढ़, जुलेड़ी, बिंजाखेत, देवराना, भूमिया की सार, कसान, बिरकाटल आदि गांवों में नुकसान हुआ है। अब फिर लगातार हो रही बारिश ने इन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जुलेड़ी, बिंजाखेत, देवराना आदि गांवों में पिछले 3 वर्षों मं हुई बारिश में कई जगहों पर भू-धंसाव हुआ है। वर्ष 2023 की बरसात में जुलेड़ी में तीन मकान जमींदोज हुए थे।

बैरागढ़ गांव सबसे संवेदनशील
बैरागढ़ गांव ने सबसे ज्यादा दंश झेले हैं। 15 जून 2014 की बरसात में गांव को भारी नुकसान हुआ था। तब आधे दर्जन से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए थे और कई पशु मलबे में दब कर मर गए थे। बैरागढ़ गांव के ठीक ऊपर स्थित कुत्ता काटली गदेरे में बरसात के दौरान भारी मात्रा में मलबा और पानी आता है, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। बैरागढ़ गांव में वर्ष 2019 में आए मलबे में मकान दबे थे। वर्ष 2023, 2024 और 2025 की बरसात में कुत्ता काटली गदेरे में आए मलबे और पानी से गांव में स्थित रिजॉर्टों को भी नुकसान पहुंचा था। बाढ़ की दृष्टि से इसे अति संवेदनशील गांवों में गिना जाता है।
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- संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। भारी बारिश के दौरान आपदा राहत टीमों को सतर्क मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ एवं आपदा प्रभावित गांवों में अधिक सतर्कता रखने की अपील करते हैं।- चतर सिंह चौहान, एसडीएम यमकेश्वर
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